Jaipur News: जयपुर के सुभाष चौक थाना इलाके में जर्जर भवन का छज्जा गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जिसकी पहचान शाकिरा के रूप में हुई है. ये घटना उस वक्त की है जब महिला हवेली के नीचे से गुजर रही थी, तभी गुमटी का छज्जा गिर गया. घर का मालिक एक किरायेदार के साथ मिलकर छज्जे को हथौड़े से तोड़ रहा था. जर्जर हालत में होने के कारण छज्जा अचानक गिर गया.
दरअसल, शाकिरा इस जर्जर हवेली के पास के एक मकान में रहती थी. इससे पहले इस हवेली के छत का प्लास्टर गिरने से एक बच्चे की मौत हुई थी. इस तरह की कई घटनाएं आए दिन परकोटे के इलाके में होती हैं. यहां सैंकड़ों जर्जर हवेलियां हैं. इन हवेलियों में रहने वाले किरायेदार और इसके आस पड़ोस के लोग मौत के साएं में रहने को मजबूर हैं.
इन जर्जर हवेलियों के मालिक मासूम लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहे हैं. यहां किसी भी वक्त अनहोनी हो सकती है. पड़ोस में रहने वाले जाकिर ने बताया कि इस हवेली में कुछ दिन पहले एक बच्चे की मौत हो गई थी. शाकिरा के बेटे ने बताया कि अम्मी सुबह के वक्त हवेली के नीचे से जा रही थीं, तभी अचानक छज्जा गिर गया. छज्जे पर हथौड़े चलाने से पहले किसी को कोई सूचना नहीं दी गई. घटना के बाद से मकान मालिक समीर फरार है.
घटना के बाद किरायेदारों ने बयां किया दर्द
हवेली में दाखिल होते ही अंदर पूरा भवन जर्जर नजर आता है, जिस कमरे में 8 दिन पहले बच्चे की मौत हुई वहां अभी भी मलबा गिरा हुआ है. वहीं आसपास भी कई ऐसे जर्जर मकान मौजूद हैं. ऐसे लगभग सभी मकानों में किरायेदार रहते हैं. बिहार- बंगाल से यहां आकर मजदूरी करने वाले लोग कम पैसे के किराए के कारण इन मकानों में रहने को मजबूर है. इस पूरे इलाके के पास में ही जयपुर का जोहरी बाजार पड़ता है.
पश्चिम बंगाल की रहने वाली सरिता दास ने बताया कि वे 10 साल से यहां एक मकान में किराए पर रहती हैं. एक कमरे में 4 लोग रहते हैं. 1800 रुपए किराया है. मकान जर्जर है. बरसात में पानी भी टपकता है. कम किराए के कारण लोग यहां रहने को मजबूर हैं. पश्चिम बंगाल के ही रहने वाले नाथराम ने बताया कि, वह यहां 10 साल से रह रहे हैं. मकान मालिक देखने आता है. बोलता है ठीक करवाएगा, लेकिन अभी तक कुछ ठीक नहीं हुआ और अब जो किस्मत में लिखा होगा वही होगा.
बड़ी घटना का इंतजार कर रहे मकान मालिक
दरअसल, जयपुर के परकोटे में ऐसी सैकड़ो हवेलियां हैं, जो जर्जर हैं. निगम आए दिन मकान मालिकों को नोटिस जारी करता है. मकान मालिकों के कान पर कोई जूं नहीं रेंगती. इसी सब के बीच हजारों जिंदगियां मौत के साए के बीच रहने को मजबूर है.