जैसलमेर के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान एक महिला को बेड़ियों से मुक्त कराकर पुनर्वास गृह पहुंचाया गया. मानसिक रूप से कमजोर बताई जा रही है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ललित पुरोहित उसके इलाज और पुनर्वास कराया.
पैरों में लगी थी बेड़ियां
डीएलएसए के त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान पैरा लीगल वॉलेंटियर (पीएलवी) कमल किशोर ने न्यायाधीश ललित पुरोहित को सूचना दी. बताया कि जैसलमेर के बड़ा बाग क्षेत्र स्थित भट्टों की ढाणी में एक महिला को बेड़ियों से जकड़कर रखा गया है. न्यायाधीश स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया. महिला के पैरों में बेड़ियां लगी हुई थीं, और पत्थरों से बने एक अस्थायी स्थान पर रखा गया था. महिला की हालत देखकर न्यायाधीश ने तत्काल कार्रवाई करते हुए समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक कुंभ सिंह से संपर्क किया. इसके बाद 108 एम्बुलेंस से पुनर्वास गृह पहुंचाया.
देवर ने महिला को बांध रखा था
पूछताछ के दौरान महिला ने अपना नाम सुगना बताया. उसने बताया कि उसे उसके देवर ने बेड़ियों से बांधकर रखा था. इसके पीछे का स्पष्ट कारण नहीं बता सकी. महिला ने यह भी बताया कि उसके पांच बच्चे हैं, जिनमें कुछ अभी छोटे हैं, और एक बच्चे की शादी हो चुकी है.
मानसिक रूप से कमजोर है महिला
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला मानसिक रूप से कमजोर है, और लंबे समय से उसे उचित उपचार नहीं मिल पाया था. पारिवारिक परिस्थितियों और जागरूकता के अभाव में उसे बेड़ियों में बांधकर रखा गया था. न्यायाधीश ललित पुरोहित ने बताया कि महिला की काउंसलिंग कराने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश काउंसलर को दिए गए हैं. उसके इलाज, देखभाल और पुनर्वास की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं. मामले की विस्तृत रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भी भेजी जाएगी.
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