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ऑनलाइन गेम खेलते-खेलते कहीं आपको तो नहीं हो गई ये बीमारी? बर्बाद हो रहा युवा वर्ग

गैंबलिंग यानी जुआ, भारत में गैर-कानूनी है. लेकिन दांव लगाने (पैसे) के लिए ऑनलाइन गैमिंग एक ग्रे एरिया बना हुआ है. लग्जरी लाइफ स्टाइल, स्टाइलिश बाइक, महंगे मोबाइल पाने की हसरत भी युवाओं को ऑनलाइन गेमलिंग के जाल में धकेल रही है.

ऑनलाइन गेम खेलते-खेलते कहीं आपको तो नहीं हो गई ये बीमारी? बर्बाद हो रहा युवा वर्ग
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Rajasthan News: थोड़े समय में ज्यादा पैसे कमाने के लालच में कई युवा ऑनलाइन गैंबलिंग (Online Gambling) का शिकार होकर अपना समय व धन बर्बाद करते जा रहे हैं. शहरों, कस्बों के साथ गांवों में ऑनलाइन गेम और गैंबलिंग का जुनून इस कदर छाया है कि युवा करोड़पति बनने के सपना देख रहे हैं और मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलकर अपना समय और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं. युवा पीढ़ी के लिए यह खतरनाक बीमारी बन गई है. युवाओं का भविष्य खराब करने वाली इस बीमारी से आखिर कैसे बचा जा सकता है? देखिए डीडवाना से हमारे संवाददाता जहीर अब्बास उस्मानी की विशेष रिपोर्ट...

'डांट-फटकार इसका इलाज नहीं'

युवाओं को जुए की लत लगाने वाले ऑनलाइन गेम पर रोक व स्थाई समाधान नहीं होने से ऐसे खेल वित्तीय जोखिम के साथ मानसिक बीमारी के कारण बनने लगे हैं. इससे युवाओ में तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है. मनोचिकित्सक डॉक्टर सुरेंद्र जालोया के मुताबिक, युवाओं में ऑनलाइन गैंबलिंग की लत पड़ जाती है तो ये बीमारी बन जाती है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में गैंबलिंग डिसऑर्डर या पैथोलॉजिकल गैंबलिंग कहते हैं. पैथोलॉजिकल गैंबलिंग ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के तहत होने वाली बीमारी है. परिजनों को समय रहते पीड़ित युवाओं पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है. गैंबलिंग डिसऑर्डर के शिकार युवा जब ऑनलाइन जुआ खेलते वक्त सबकुछ गवां बैठते हैं तब उन्हें एहसास होता है. लेकिन इस स्थिति में अपनी लत के चलते वे ऑनलाइन गैंबलिंग को छोड़ भी नहीं पाते. ऐसे मरीजों से अभिभावकों को अच्छा व्यवहार रखना चाहिए, क्योंकि डांट फटकार इसका इलाज नहीं है. बल्कि इस मनोविकार से दूर करने के लिए लगातार काउंसलिंग की और सहारे की जरूरत है.

भारत में 42 करोड़ सक्रिय गेमर्स

भारत में लगभग 42 करोड़ सक्रिय ऑनलाइन गेमर्स हैं. देश के युवा मेहनत और बुद्धि का कम उपयोग करके शॉर्टकट तरीके से अधिक पैसा बनाने के लिए ऑनलाइन सट्टेबाजी साइटों में धड़ल्ले से शामिल हो रहे हैं. कई ऑनलाइन गेम साइट गेम का आयोजन कर रही हैं. इस ऑनलाइन गेम साइट के लिए कानूनी आयु सीमा 18 वर्ष है. लेकिन फर्जी आईडी और आयु सीमा की जांच के लिए ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं है. हमारे देश में ऑनलाइन जुआ में सबकुछ गवां देने के बाद युवकों द्वारा आत्महत्या करने के भी कई मामले सामने आए हैं. लोगों के इस तरह की गतिविधियों की ओर रुख करने का एक और मुख्य कारण यह है कि कई चर्चित हस्तियां, जो आम लोगों के लिए वास्तविक रोल मॉडल हैं, इन ऑनलाइन सट्टेबाजी साइटों का जोरो शोरो से प्रचार कर रही हैं और अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को अपना पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. 

'इसे रोक पाना काफी मुश्किल है'

कुचामन सिटी पुलिस उपाधीक्षक अरविंद विश्नोई के मुताबिक, आज के दौर में सबके हाथ में इंटरनेट और मोबाइल है, जिसमें तमाम ऑनलाइन गेमिंग एप भी चलते हैं, जिसे दूसरे प्रांत या देश से संचालित किया जाता है. इससे लोगों को रोकना पुलिस के लिए काफी मुश्किल काम है. हां, अगर कोई शिकायत करता है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उस पर साइबर अपराध और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है. विश्नोई का यह भी कहना है कि, इस तरह की लत से बचाने के लिए, माता-पिता को अपने बच्चों पर पूरी तरह से मॉनिटरिंग करनी चाहिए. पुलिस उपाधीक्षक अरविंद विश्नोई ने ऑनलाइन गेम खेलने वाले युवाओं के नाम एक संदेश दिया है, जिसके मुताबिक कहीं ऐसा न हो कि, एप की प्रोग्रामिंग के तहत ये ऑनलाइन गेम आपकी सिर्फ जेब ही ढीली करते रहे. अगर आप लगातार हार रहे हैं तो सावधान व सतर्क हो जाएं. ठगी के शिकार होने से बचें.

सेलिब्रिटी को नहीं करना चाहिए प्रचार

युवा पीढ़ी को इस ऑनलाइन जुए की लत से बचाने के लिए, देश के फिल्म स्टारों, क्रिकेट और अन्य खेलों के सेलिब्रिटीज को ऑनलाइन गैंबलिंग वाले ऐप और वेबसाइट की साइट का प्रचार न करके इसके दुष्प्रभाव वाले संदेश जारी करने चाहिए. साथ ही युवाओं को भी यह समझना चाहिए की शॉर्टकट में, सिर्फ मोबाइल एप के जरिए करोड़पति बनना एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा नहीं होता. उन्हें अगर करोड़पति बनना है और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करना है तो उन्हें रुचि वाले क्षेत्र में कैरियर बनाकर कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है.

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