Godawan Conservation
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जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर तकनीक से गुजरात में एक दशक बाद जन्मा गोडावण का चूजा, 19 घंटे की यात्रा ने रचा इतिहास
- Saturday March 28, 2026
- Written by: श्रीकांत व्यास, Edited by: सौरभ कुमार मीणा
राजस्थान और गुजरात के संयुक्त प्रयासों से गोडावण संरक्षण में बड़ी सफलता मिली है. “जंपस्टार्ट अप्रोच” के जरिए 19 घंटे की ट्रांसलोकेशन के बाद गुजरात में एक दशक बाद चूजे का जन्म हुआ जो संरक्षण की नई उम्मीद बना है.
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राजस्थान में AI तकनीक से रामदेवरा में जन्मा इस साल का पहला गोडावण चूजा, जैसलमेर में संख्या पहुंची 73
- Saturday March 28, 2026
- Written by: श्रीकांत व्यास, Edited by: सौरभ कुमार मीणा
राजस्थान में जैसलमेर के रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में AI तकनीक से गोडावण का पहला चूजा जन्मा है. इस सफलता से गोडावण संरक्षण को नई उम्मीद मिली है और जिले में इनकी संख्या बढ़कर 73 हो गई है.
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Rajasthan: दो माह में विलुप्तप्राय गोडावण ने दिए 6 अंडे, सम सेंटर में अंडों से दो कैप्टिव-ब्रेड चूजे निकले
- Sunday June 2, 2024
- Reported by: श्रीकांत व्यास, Edited by: इकबाल खान
पिछले कुछ सालों से क्लोजर में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए गए हैं. वर्तमान में 70 से ज्यादा क्लोजर बने हुए हैं. इन क्लोजर में मानवीय दखल बिल्कुल नहीं है. ऐसे में मादा गोडावण को सुरक्षित वातावरण मिलने पर वह प्रजनन करती है. लगातार प्रजनन बढ़ने के पीछे वजह क्लोजर की सुरक्षा ही है.
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जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर तकनीक से गुजरात में एक दशक बाद जन्मा गोडावण का चूजा, 19 घंटे की यात्रा ने रचा इतिहास
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राजस्थान और गुजरात के संयुक्त प्रयासों से गोडावण संरक्षण में बड़ी सफलता मिली है. “जंपस्टार्ट अप्रोच” के जरिए 19 घंटे की ट्रांसलोकेशन के बाद गुजरात में एक दशक बाद चूजे का जन्म हुआ जो संरक्षण की नई उम्मीद बना है.
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राजस्थान में जैसलमेर के रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में AI तकनीक से गोडावण का पहला चूजा जन्मा है. इस सफलता से गोडावण संरक्षण को नई उम्मीद मिली है और जिले में इनकी संख्या बढ़कर 73 हो गई है.
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Rajasthan: दो माह में विलुप्तप्राय गोडावण ने दिए 6 अंडे, सम सेंटर में अंडों से दो कैप्टिव-ब्रेड चूजे निकले
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पिछले कुछ सालों से क्लोजर में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए गए हैं. वर्तमान में 70 से ज्यादा क्लोजर बने हुए हैं. इन क्लोजर में मानवीय दखल बिल्कुल नहीं है. ऐसे में मादा गोडावण को सुरक्षित वातावरण मिलने पर वह प्रजनन करती है. लगातार प्रजनन बढ़ने के पीछे वजह क्लोजर की सुरक्षा ही है.
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