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जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर तकनीक से गुजरात में एक दशक बाद जन्मा गोडावण का चूजा, 19 घंटे की यात्रा ने रचा इतिहास

राजस्थान और गुजरात के संयुक्त प्रयासों से गोडावण संरक्षण में बड़ी सफलता मिली है. “जंपस्टार्ट अप्रोच” के जरिए 19 घंटे की ट्रांसलोकेशन के बाद गुजरात में एक दशक बाद चूजे का जन्म हुआ जो संरक्षण की नई उम्मीद बना है.

जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर तकनीक से गुजरात में एक दशक बाद जन्मा गोडावण का चूजा, 19 घंटे की यात्रा ने रचा इतिहास
राजस्थान और गुजरात के संयुक्त प्रयासों से गोडावण संरक्षण में बड़ी सफलता मिली है.

Rajasthan News: अति संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल राजस्थान के राज्य पक्षी "द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड" यानी गोडावण के संरक्षण को लेकर वन विभाग व वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के प्रयासों से देश को एक ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है. राजस्थान और गुजरात के संयुक्त प्रयासों से गुजरात में करीब एक दशक बाद गोडावण के चूजे का जन्म हुआ है. इस उपलब्धि की जानकारी केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav ने साझा करते हुए इसे संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर बताया.

“जंपस्टार्ट अप्रोच” बनी नई उम्मीद

यह सफलता “जंपस्टार्ट अप्रोच” नामक आधुनिक तकनीक के जरिए हासिल हुई है. इस तकनीक में वैज्ञानिक तरीके से निषेचित अंडे को सुरक्षित वातावरण में तैयार कर प्राकृतिक घोंसले में स्थापित किया जाता है. Wildlife Institute of India और दोनों राज्यों के वन विभागों के सहयोग से इस योजना को सफल बनाया गया. इससे यह साबित हुआ कि वैज्ञानिक नवाचार से विलुप्ति के कगार पर खड़ी प्रजातियों को बचाया जा सकता है.

19 घंटे की ट्रांसलोकेशन ने दिलाई सफलता

इस उपलब्धि के पीछे एक बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन रहा. गुजरात के कच्छ क्षेत्र में एक मादा गोडावण ने निष्फल अंडा दिया था. इसके बाद राजस्थान के जैसलमेर स्थित ब्रीडिंग सेंटर से एक निषेचित अंडे को विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे की लंबी यात्रा कर कच्छ पहुंचाया गया. 22 मार्च को इस अंडे को मादा के घोंसले में रखा गया और 26 मार्च को सफलतापूर्वक चूजे का जन्म हुआ.

“फॉस्टर मदर” मॉडल की बड़ी कामयाबी

मादा गोडावण ने इस अंडे को अपना मानकर सेया और चूजे को जन्म दिया. फिलहाल चूजा अपनी “फॉस्टर मदर” के साथ सुरक्षित है और उसकी देखभाल की जा रही है. यह मॉडल संरक्षण विज्ञान में एक नई दिशा दिखाता है और भविष्य के प्रयासों के लिए उम्मीद जगाता है.

जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर की अहम भूमिका

राजस्थान के सम और रामदेवरा स्थित अत्याधुनिक ब्रीडिंग सेंटर इस सफलता की रीढ़ बने. यहां विकसित तकनीक और विशेषज्ञों के अनुभव से गोडावण की संख्या बढ़कर 73 तक पहुंच गई है, जिसमें इस सीजन के नए चूजे भी शामिल हैं. आने वाले समय में इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की तैयारी चल रही है.

विशेषज्ञों ने बताया कैसे हुआ संभव

डेजर्ट नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार मादा गोडावण ने पहले जो अंडा दिया था वह इनफर्टाइल था यानी उससे चूजा नहीं निकल सकता था. वैज्ञानिकों ने उसे बदलकर निषेचित अंडा रखा जिसे मादा ने स्वीकार कर लिया. अब चूजा पूरी तरह स्वस्थ है और अपने प्राकृतिक व्यवहार के साथ बढ़ रहा है.

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