पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात' कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में राजस्थान के राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण का जिक्र करके देशभर का ध्यान इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण की ओर खींचा. प्रधानमंत्री ने कहा कि गोडावण कभी हमारे रेगिस्तानी इलाकों की पहचान हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसकी संख्या बेहद कम हो गई और यह विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया. हालांकि अब इसके संरक्षण के लिए देश में बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर सकारात्मक परिणाम हासिल हो रहे हैं.
2018 में शुरू हुए “प्रोजेक्ट GIB”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गोडावण के संरक्षण के लिए प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं और अब नए जीवन की शुरुआत दिखाई दे रही है. पीएम मोदी के इस जिक्र को लेकर जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ बृज मोहन गुप्ता ने खुशी जताई. उन्होंने कहा कि ‘मन की बात' जैसे राष्ट्रीय मंच पर गोडावण संरक्षण कार्यों का जिक्र होना न केवल वन विभाग के लिए, बल्कि जैसलमेर वासियों के लिए भी गर्व का विषय है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से शुरू हुए “प्रोजेक्ट GIB” के तहत किए जा रहे प्रयास अब रंग ला रहे हैं और प्रधानमंत्री का यह जिक्र उन प्रयासों के लिए एक तरह से प्रेरणा और आशीर्वाद है. डीएफओ गुप्ता ने बताया कि इस बार जैसलमेर में आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक के जरिए भी गोडावण के प्रजनन में सफलता मिली है. हाल ही में तीन नए चूजों के जन्म के साथ ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की संख्या बढ़कर 82 तक पहुंच गई है. इस ब्रीडिंग सीजन में 10 मार्च से अब तक कुल 14 चूजों का जन्म हुआ है, जिनमें 10 चूजे AI तकनीक से और 4 प्राकृतिक तरीके से पैदा हुए हैं.
जोखिम भरा होता है प्राकृतिक प्रजनन
गोडावण का प्राकृतिक प्रजनन बेहद धीमा और जोखिम भरा होता है. खुले वातावरण में अंडों की सुरक्षा, शिकारियों का खतरा और बदलते मौसम जैसे कई कारक इसके अस्तित्व के लिए चुनौती बने रहते हैं. ऐसे में AI तकनीक इस संरक्षण अभियान में गेमचेंजर साबित हो रही है. गौरतलब है कि “प्रोजेक्ट GIB” केंद्र और राज्य सरकार के साथ वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयासों से संचालित किया जा रहा है. वन विभाग की टीम ब्रीडिंग सेंटर में 24 घंटे निगरानी रख रही है और चूजों की विशेष देखभाल की जा रही है.

अगर खुले क्षेत्र के गोडावण की बात करें तो भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा 7 से 17 अप्रैल 2025 के बीच की गई राष्ट्रीय वैज्ञानिक गणना (थार सर्वें) में जैसलमेर और आसपास के करीब 22 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गोडावण के लिए सर्वें किया गया. ताजा आंकड़ों के अनुसार, डेजर्ट नेशनल पार्क, पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज और अन्य खुले क्षेत्रों में 130 गोडावण पाए गए. 2017 में खुले क्षेत्र में संख्या 128 (±19) थी, जो अब 130 (±21) हो गई है. विशेषज्ञ इसे स्थिरता और हल्की वृद्धि के रूप में सकारात्मक संकेत मानते हैं.
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