वक्ता ने कहा कि ड्रोन, मानवरहित सिस्टम, AI और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ने युद्ध की गति, पैमाने और स्वरूप को बदल दिया है, और भविष्य की सैन्य ताकत प्लेटफॉर्म की संख्या से नहीं, बल्कि सेंसिंग, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई की गति से तय होगी. उन्होंने बदलते भू-राजनीतिक माहौल में हर देश के लगातार सतर्क रहने की जरूरत बताई. उनके अनुसार कोई भी देश अपने हथियार और अहम तकनीक खुद बनाए बिना लंबे ड्रोन युद्ध को नहीं झेल सकता, इसी वजह से भारत ने रक्षा में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति बनाया और भारतीय सशस्त्र बल बुनियादी बदलाव से गुजर रहे हैं.