राजस्थान के विश्वविद्यालयों में इन दिनों संग्राम छिड़ा है। मुद्दा है राजस्थान यूनिवर्सिटी में आयोजित RSS का 'मातृ शक्ति वंदन' कार्यक्रम। एक तरफ NSUI सड़कों पर है, लाठियां चल रही हैं और आरोप लग रहा है कि शिक्षा के मंदिर का 'भगवाकरण' किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब इसी कैंपस में कांग्रेस के बड़े नेता सियासी रैलियां करते हैं और शक्ति प्रदर्शन होता है, तब क्या पढ़ाई का माहौल खराब नहीं होता? क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी की परिभाषा केवल एक विचारधारा तक सीमित है?