
सरदारपुरा थाना पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेजन अधिकारी बन कनाडा व यूएस के लोगों के साथ ठगी करने वाले मास्टरमाइंड आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने 30 जून की दोपहर सरस डेयरी रोड स्थित साईबर पार्क स्थित मनोहर बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर संचालित डाटा स्प्रेड नाम का फर्जी कॉल सेंटर पर दबिश दी थी.वहां ठग कम्प्यूटर की सहायता से इंटरनेशनल कॉल कर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रुपए हड़प कर साइबर कर फ्रॉड की घटना को अंजाम दे रहे थे.
फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी में 8 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर आठ आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके पास से से 16 सीपीयू, 20 मॉनिटर 22 हैडफोन, 1 लैपटॉप चार्जर, तीन राउटर केबल, तीन नेट कनेक्टर , 30 माउस और 25 कीबोर्ड जब्त किए गए. इस मामले में मुख्य आरोपी व मास्टरमाइंड पार्थ मौके से फरार हो गया था.
पुलिस आरोपी से कर रही है पूछताछ
थानाधिकारी सोमकरण ने बताया कि कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने वाला मास्टरमाइंड व संचालक पार्थ पुत्र जयेश भट्ट निवासी 17 सुरभि अपार्टमेंट मणिनगर को अहमदाबाद से दस्तयाब किया है. आरोपी से पूछताछ के बाद उसे गुरुवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है. वह किस तरह से लोगों को ठगता था और अब तक कितनों को ठग चुका है, इस मामले में पुलिस आरोपी से पूछताछ करेगी. इसके साथ ही यह भी पता लगाएगी कि उसने भारत के किसी व्यक्ति को तो नहीं ठगा है.
अमेजन कंपनी का अधिकारी बताकर ऐसे करते थे ठगी
पार्थ जयेश भट्ट ने पूछताछ में बताया कि वे बिना परमिशन फर्जी तरीके से लोगों के साथ ठगी करने के लिए डाटा स्प्रेड नामक कॉल सेंटर चलाते थे. वे पहले कम्प्यूटरों व अपने साथियों के साथ मिलकर कनाडा व यूएसए के लोगों के मोबाइल नम्बरों की लिस्ट प्राप्त करते थे. फिर उनको एनी डेस्क ऐप में अपलोड कर आईबीम वीआईसीएल- डायल कंपनी के सर्वर के माध्यम से टैक्स मैसेज व वॉइस मैसेज करते हैं. वॉइस मैसेज में एक आईवीआर मैसेज भी होता है, जिसमें ठग खुद को स्थानीय अमेजन कंपनी का अधिकारी बता कर बता कर विदेशियों को झांसा देते हैं.
हर महीने ठगी के जरिये 25 लाख रुपए की कमाई
इसके बाद उनके कॉल को पार्थ के पास फारवर्ड करके वासमार्ट गिफ्ट कार्ड, एप्पल गिफ्ट कार्ड और सेफोरा गिफ्ट कार्ड के रूप में डॉलर में पेमेंट लेकर फर्जी तरीके से रुपयों में कनवर्ट कर ठगी कर लेते थे. पेमेंट जमा नहीं करवाने पर उनको डरा धमकाकर गिफ्ट कार्ड के माध्यम से रुपए जमा करवाने को कहते थे.
इस तरह फर्जी कॉल सेन्टर के माध्यम से एक महीने में औसतन 30 हजार यूएस डॉलर (25 लाख रुपए) का फ्रॉड करते थे. फ्रॉड के समय रुपयों को हवाला के जरिए पार्थ प्राप्त कर लेता और उन रुपयों को अपने बाकी साथियों में बांट देता था.