क्या है डायबिटीज में दूध और दही खाने का सही तरीका? जानें क्या कहता है आयुर्वेद ?

डायबिटीज के मरीज दूध और दही ले सकते हैं, लेकिन सही मात्रा, सही समय और सही प्रकार का चुनाव बहुत ज़रूरी है.

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आज की जीवनशैली में डायबिटीज की समस्या हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है. बच्चे डायबिटीज के साथ जन्म भी ले रहे हैं, और यह आने वाली पीढ़ी और देश के लिए खतरे की घंटी है. सरकार लगातार डायबिटीज की रोकथाम के लिए प्रोग्राम चलाती है और जागरुकता अभियान भी चला रही है, लेकिन आज भी डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को ये नहीं पता है कि उनके लिए उचित आहार क्या है. आज हम जानेंगे कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को दूध और दही कितनी मात्रा में लेना चाहिए.

डायबिटीज के मरीज दूध और दही ले सकते हैं, लेकिन सही मात्रा, सही समय और सही प्रकार का चुनाव बहुत ज़रूरी है. दूध और दही दोनों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए ये ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाते. लेकिन साथ ही ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि किस समय और कितनी मात्रा जरूरी है.

दूध और दही दोनों ही डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी हैं क्योंकि ये रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन होता है

जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, पेट के अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं, और भूख नियंत्रित करने में मददगार हैं.

अब जानते हैं सेवन का सही तरीका. पहले बात करते हैं दूध की. एक कप दूध और दही का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 30-40 के बीच होता है, जो मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए सही है. डायबिटीज के मरीज को 1 दिन में 500 ग्राम पीना चाहिए लेकिन अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर. फुल फैट दूध से परहेज करें और लो-फैट दूध का सेवन करें, साथ ही दूध में किसी तरह का मीठा पदार्थ शामिल न करें. अगर थोड़ा मीठा खाने का मन है तो दूध के साथ प्राकृतिक तरीके से पकी हुई खजूर ले सकते हैं. दूध का सेवन सुबह और रात के समय किया जा सकता है.

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वहीं दही का सेवन आयुर्वेद के अनुसार दिन के समय करना चाहिए. दही में भी किसी तरह का मीठा न डालें, बल्कि उसमें भुना हुआ जीरा और काला नमक डालकर सेवन करें. एक बार में एक कटोरी दही का सेवन किया जा सकता है.