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This Article is From Mar 05, 2026

Rajasthan: विधानसभा में गूंजा अजमेर का पट्टा घोटाला, विधायक रविंद्र भाटी के तीखे सवाल, मंत्री ने 4 अधिकारियों को किया APO

Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा में आज( गुरूवार) ने शिव विधायक रविंद्र भाटी ने अजमेर नगर निगम की उन अनियमितताओं  को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा की गई.

Rajasthan: विधानसभा में गूंजा अजमेर का पट्टा घोटाला, विधायक रविंद्र भाटी के तीखे सवाल, मंत्री ने 4 अधिकारियों को किया APO
jabar Singh Khara ( Left) , Ravindra Singh Bhati (Right)
youtube ( vidhansabha Channel)

Rajasthan News:  राजस्थान विधानसभा में होली के बाद आज (गुरुवार) बजट सत्र की फिर से शुरूआत हुई. जिसमें शिव विधायक रविंद्र भाटी ने अजमेर के नगर निगम की तरफ से जारी 1971 में फर्जी पट्टे की अनियमितताओं के लिए लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा की. इस प्रस्ताव में उन्होंने नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मामले पर की गई  कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी. 

मामले को लेकर मंत्री खर्रा ने दी जानकारी

शिव विधायक के सवाल को लेकर नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में बताया कि ग्रामथोक तेलियान के खसरा नंबर 2227 की यह भूमि 1971 में नगर सुधार न्यास (UIT) द्वारा अधिग्रहित की गई थी, जिसके मुआवजे के लिए संबधित खातेदारों को न्याससमिति बुलाया गया था. लेकिन इसपर सहमति नहीं बन सकी जिसके कारण यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में न्यास के नाम नहीं चढ़ सकी. इसी कानूनी उलझन का फायदा उठाकर वर्ष 2020 में यहां नियम विरुद्ध आवासीय नक्शे पास किए गए, जिन्हें बाद में निरस्त करना पड़ा.

 FIR के लिए लिखा गया है लैटर

मंत्री ने आगे बताया कि वर्तमान में अजमेर के सिविल जज कोर्ट में यह केस अंडर ट्रायल है. इस केस में फैक्ट्स छिपाने को लेकर FIR दर्ज कराई है, इसमें चार लोग जिम्मेदार हैं. जिसमें डिप्टी कमिश्नर विकास, सीनियर ड्राफ्टर, जूनियर इंजीनियर सिविल और जूनियर असिस्टेंट का नाम शामिल है. इन सभी को राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. साथ ही, इन्हें आज ही अजमेर से हटाकर APO करने के आदेश दे दिए गए हैं.

दो हफ़्ते के अंदर कलेक्टर करे जांच 

साथ ही  मंत्री ने बताया कि इस मामले में APO किए गए सभी अधिकारियों की जांच अजमेर कलेक्टर को सौंपी गई है. जिसे DM दो हफ़्ते के अंदर अपने अलावा अन्य किसी अतिरिक्त कलेक्टर के जरिए मिलकर इस पूरे मामले की जांच करनी होगी. साथ ही, नगर निगम के जरिए पिछले 6 महीने में  जारी किए गए सभी पट्टों की भी जांच करेगा. जिसे घोटालों की सही जानकारी मिल सके.

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