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This Article is From Nov 20, 2025

अजमेर में रिटायर्ड रेलकर्मी को लगा 46 लाख का चूना, शेयर बाजार के नाम पर ठगों ने खेला बड़ा खेल

राजस्थान के अजमेर में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी को शेयर बाजार ठगी का शिकार बनाया गया है. जिसमें ठगों ने फेसबुक ऐड, व्हाट्सऐप ग्रुप और फर्जी ऐप से 46 लाख 39 हजार रुपये ठग लिए. 

अजमेर में रिटायर्ड रेलकर्मी को लगा 46 लाख का चूना, शेयर बाजार के नाम पर ठगों ने खेला बड़ा खेल
अजमेर में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी को शेयर बाजार ठगी का शिकार बनाया गया है.

Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर शहर में एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बन गए. ठगों ने शेयर बाजार में तगड़ा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उनसे 46 लाख 39 हजार रुपये ठग लिए. पीड़ित का नाम इफ्तेखार अहमद सिद्दीकी है, जिन्होंने इस मामले की रिपोर्ट साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है. यह घटना साइबर अपराधों की बढ़ती समस्या को उजागर करती है जहां आम लोग आसान कमाई के चक्कर में फंस जाते हैं.

फेसबुक ऐड से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

पीड़ित ने बताया कि सब कुछ फेसबुक पर शेयर बाजार से जुड़े एक विज्ञापन से शुरू हुआ. उस पर क्लिक करने के बाद उनके व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया जिसमें हर दिन 10 से 30 प्रतिशत तक रिटर्न देने का वादा किया गया था. ठगों ने कहा कि अगर उन्हें शेयर बाजार की ज्यादा जानकारी नहीं है तो वे पूरा गाइड करेंगे.

इस तरह उन्होंने पीड़ित का भरोसा जीतना शुरू कर दिया. ऐसे मामलों में ठग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को जाल में फंसाते हैं और छोटे-छोटे वादों से बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं.

फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर ली बैंक डिटेल्स

धोखेबाजों ने पीड़ित को गूगल प्ले स्टोर से एक ऐप डाउनलोड करने को कहा. इस ऐप के जरिए उन्होंने पीड़ित की पर्सनल जानकारी और बैंक डिटेल्स अपलोड करवा लीं. फिर उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में ऐड कर लिया जहां फेक ट्रेडिंग एक्टिविटी दिखाकर विश्वास बढ़ाया गया.

पीड़ित ने कहा कि इसी दौरान उनसे बार-बार पैसे जमा करने को कहा गया. कुल 11 अलग-अलग लेनदेन में 46 लाख 39 हजार रुपये ठग लिए गए. यह तरीका बहुत चालाकी भरा था क्योंकि ग्रुप में सब कुछ असली लग रहा था लेकिन सब नकली था. ऐसे ठग ग्रुप्स में कई लोगों को जोड़कर सामूहिक भरोसा बनाते हैं और फिर पैसे ऐंठते हैं.

कई बैंक खातों में ट्रांसफर हुए पैसे

पीड़ित के अनुसार ठगी की रकम 11 अलग-अलग मोबाइल नंबरों से मिले निर्देशों पर चार बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई. जब उन्हें ठगी का पता चला तो उन्होंने फौरन साइबर पुलिस में रिपोर्ट की. पुलिस ने केस दर्ज करके जांच की कमान रामगंज थाने के इंचार्ज डॉक्टर रविश सामरिया को सौंपी है.

अब टीम इन संदिग्ध खातों मोबाइल नंबरों और इस्तेमाल किए गए ऐप की टेक्निकल जांच कर रही है. ठगों का पता लगाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है. यह मामला बताता है कि ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए और अनजान ऐप्स या ग्रुप्स से दूर रहना चाहिए. पुलिस का कहना है कि ऐसे केसों में जल्दी रिपोर्ट करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

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