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राजस्थान में 2 नई रेल लाइनों के लिए लोकेशन सर्वे तेज, भारत-पाक बॉर्डर के साथ दौड़ेगी ट्रेन

अनूपगढ़ से खाजूवाला होते हुए जैसलमेर तक लगभग 260 किलोमीटर लंबी नई लाइन और जैसलमेर से बाड़मेर होते हुए भीलड़ी/भाभर तक करीब 380 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रस्तावित है. दोनों परियोजनाएं सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. 

राजस्थान में 2 नई रेल लाइनों के लिए लोकेशन सर्वे तेज, भारत-पाक बॉर्डर के साथ दौड़ेगी ट्रेन
राजस्थान में 2 नई रेल लाइनों के लिए लोकेशन सर्वे तेज

Rajasthan News: पश्चिमी राजस्थान के भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है. इसके तहत अनूपगढ़-खाजूवाला-जैसलमेर और जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी (वाया बाड़मेर) दो नई रेल लाइन बननी हैं. इन दोनों लाइनों का फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) का काम तेजी से चल रहा है. इस बारे में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में अनूपगढ़-खाजूवाला-जैसलमेर और जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी वाया बाड़मेर नई रेल लाइनों के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) का कार्य जारी है.

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये रेल लाइनें

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये प्रस्तावित रेल लाइनें भारत-पाकिस्तान सीमा के समानांतर विकसित की जा रही हैं. अनूपगढ़ से खाजूवाला होते हुए जैसलमेर तक लगभग 260 किलोमीटर लंबी नई लाइन और जैसलमेर से बाड़मेर होते हुए भीलड़ी/भाभर तक करीब 380 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रस्तावित है. दोनों परियोजनाएं सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. 

इन रेल लाइनों के पूरा होने से सीमा क्षेत्र में सेना की आवाजाही और आपूर्ति व्यवस्था काफी मजबूत होगी. जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि साबित होगा. साथ ही, इन लाइनों से जैसलमेर और बाड़मेर जैसे पर्यटन स्थलों की पहुंच बेहतर होगी. थार के रेगिस्तानी इलाकों में पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी.

सर्वे पूरा होने के बाद बढ़ेगा काम

स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर सुलभ होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि फिलहाल फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य प्रगति पर है और इसके पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. भारतीय रेल द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. पश्चिमी राजस्थान के विकास में ये नई रेल लाइनें मील का पत्थर साबित होंगी.

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