पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने सीमाओं में फेरबदल को लेकर जुबानी हमला बोलते हुए इसे राज्य सरकार का 'तुगलकी फरमान' करार दिया. गहलोत का कहना है कि बायतु को बाड़मेर जिले में और गुड़ामालानी व धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से पूरी तरह अतार्किक है. इस निर्णय से गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और अधिक बढ़ गई है, जो आमजन के साथ सीधा अन्याय है. उन्होंने आरोप लगाए कि यह निर्णय जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के उद्देश्य से किया गया है.
31 दिसंबर को जारी हुई थी अधिसूचना
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 7 अगस्त 2023 को बालोतरा के नए जिले की अधिसूचना जारी हुई थी. संशोधन के बाद, अब बालोतरा जिले में कुल 5 उपखंड, 9 तहसील और 5 उपतहसील होंगी. जिलों के पुनर्गठन के तहत गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को बालोतरा जिले में शामिल किया गया है.
जबकि बायतू उपखंड को बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है. बायतू उपखण्ड की 2 तहसील गिड़ा और पाटोदी को बालोतरा जिले में शामिल किया गया है. 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें दोनों जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव किया गया है. इस निर्णय के बाद कहीं खुशी का माहौल है, तो कहीं नाराजगी भी देखने को मिल रही है.
गहलोत ने दी ये प्रतिक्रिया
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "पिछली सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिलों का गठन किया था. लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर केवल सियासी फायदे साधने में लगी हुई है. हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं को दरकिनार कर केवल 'सियासी रोटियां' सेकने में व्यस्त है. हम इस जनविरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं."
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