आज सदन में बीजेपी सरकार और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कामकाज पर बहस होगी. इस पर कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने कहा कि पूरे देश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है. सरकार हर मोर्चे पर विफल है और फिर भी चर्चा कराना चाहती है. इसका साफ मतलब है कि सरकार के मंत्रियों को और सरकार को ये धरातल का अंदाजा नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षा-पानी जैसे जनहित के मुद्दे हैं और जिसके लिए हम चर्चा की मांग कर रहे हैं, उस पर चर्चा नहीं हो रही है. सरकार सत्ता पक्ष के विधायकों से तारीफ के पुल बंधवाना चाहती है. कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर चर्चा करके जनता, प्रदेश और सदन का टाइम खराब किया जा रहा है. लेकिन फिर भी हम सार्थक चर्चा के लिए मौजूद हैं.
सरकार पर लगाए आरोप
साथ ही उन्होंने आरोप लगाए कि सरकार को सदन ज़्यादा नहीं चलाना है, सिर्फ 27 तक सदन चलाना चाहती है. इसी वजह से डिमांड पर चर्चा पूरी नहीं हो पा रही है. आज शनिवार को भी कार्यवाही रखी गई और प्रश्नकाल खत्म कर दिया. सुबह 11 बजे सीधे ही राजस्व पर चर्चा शुरू हो गई. दोपहर 2:30 बजे के बाद चर्चा होगी. करीब 6 बजे नेता प्रतिपक्ष और फिर शाम 7 बजे सीएम चर्चा करेंगे. मैं ये कहना चाहता हूं कि जो जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, उस पर सरकार की तरफ से चर्चा नहीं हो रही है.
सदन में उठा 400 करोड़ के घोटाले का मुद्दा
वहीं, सदन के भीतर राजस्व विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान शत्रुघ्न गौतम ने 400 करोड़ के घोटाले का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि साल 1984 में बीसलपुर बांध की परिकल्पना हुई, बांध बना तो किसानों की जमीन भी गई. उन किसानों को मुआवजा दिया जाना था, लेकिन आज तक सभी किसानों को मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने कहा, "केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में केकड़ी से अजमेर रोड पर 5 किलोमीटर आगे 420 बीघा जमीन बीसलपुर विस्थापितों के लिए रिजर्व की गई थी. लेकिन उसे आवंटित नहीं किया जा सकता था, जिस जमीन की कीमत 1 करोड़ रुपए बीघा है. उस जमीन को कांग्रेस के नेताओं ने अपने चाहतों को आवंटित किया."
साल 2013 में वसुंधरा राजे ने जांच के लिए लिखा
उन्होंने कहा कि साल 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रेवेन्यू सेक्रेटरी को जांच के लिए लिखा. करीब 100 बीघा जमीन वापस राजस्व विभाग के खाते में आई. साल 2022 में कांग्रेस की सरकार ने जांच बंद करके वापस जमीन आवंटित करने के लिए लिखा. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए, साथ ही पता लगाना चाहिए कि कौन दोषी है और उस वक्त कलेक्टर, तहसीलदार और एसडीएम कौन था?
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