राजस्थान के भरतपुर जिले में एक गांव में ग्रामीणों ने अनूठी मिसाल पेश की है. गांव के मुख्य रास्ते पर लंबे समय से भरे कीचड़ और गड्ढों के कारण स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया था. बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब स्थानीय सरपंच और प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो ग्रामीणों ने हार मानने के बजाय अपना गांव अपना रास्ता की सोच के साथ खुद मोर्चा संभाल लिया. ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके मुख्य सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है.
स्थानीय प्रशासन और सरपंच ने नहीं ली सुध
मामला भरतपुर जिले के बयाना उपखंड की ग्राम पंचायत नहरौली के नगला वर्धा गांव का है. गांव के मुख्य रास्ते की हालत लंबे समय से काफी खराब है. कीचड़ और टूटे रास्ते के कारण बच्चों को स्कूल जाने में, महिलाओं और बुजुर्गों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और सरपंच को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया.
खुद ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर बनाया रास्ता
जब सरपंच और स्थानीय प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपना गांव अपना रास्ता की सोच के साथ खुद ही जिम्मा उठा लिया. सभी ने आपस में चंदा जुटाया और अपने पैसों से मुख्य रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कर दिया. आज नगला वर्धा के ग्रामीण सिर्फ रास्ता नहीं बना रहे, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक संदेश दे रहे हैं कि अगर इरादा नेक हो तो कोई भी काम असंभव नहीं.
ग्रामीणों की इस पहल की पूरे क्षेत्र में तारीफ हो रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अब कम से कम उनकी इस मेहनत को देखते हुए प्रशासन स्थायी समाधान करे, जिससे ग्रामीणों को समस्या से निजात मिले.
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