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Rajasthan: 'दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक जाम कर देंगे...', आरक्षण की मांग कर रहे सैनी-कुशवाहा समाज ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

भरतपुर में आरक्षण की आग फिर सुलगने लगी है. माली, सैनी, कुशवाहा और मौर्य समाज ने दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर हुंकार भरी है. अगर 12% आरक्षण की मांग नहीं मानी गई, तो देश का सबसे व्यस्त रेल मार्ग जाम करने की चेतावनी दी गई है. जानें क्या है पूरा मामला.

Rajasthan: 'दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक जाम कर देंगे...', आरक्षण की मांग कर रहे सैनी-कुशवाहा समाज ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर अल्टीमेटम देते सैनी-कुशवाहा समाज के लोग.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के भरतपुर जिले के उच्चैन उपखंड स्थित गांव पना में एक बार फिर आरक्षण की मांग को लेकर हलचल तेज हो गई है. कुशवाहा, माली, सैनी, शाक्य और मौर्य समाज के लोगों ने एकजुट होकर 12 प्रतिशत आरक्षण की अपनी पुरानी मांग को दोहराया है. समाज के लोगों ने न केवल बैठक की, बल्कि सीधे दिल्ली-मुंबई रेलवे लाइन पर पहुंचकर अपनी ताकत का अहसास कराया. नारेबाजी के साथ दी गई इस चेतावनी ने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह रूट देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल संपर्कों में से एक है.

सरकार के आश्वासनों से टूटा सब्र का बांध

आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी का कहना है कि समाज लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन हर बार सरकार की ओर से सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिलते हैं. गुरुवार को हुई इस अहम बैठक में समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है. अशोक सेना के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो समाज के लोग इसी व्यस्त रेलवे ट्रैक पर बैठने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

देश की सबसे व्यस्त रेल लाइन पर जाम का खतरा

जिस दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक को जाम करने की धमकी दी गई है, वह भारत की लाइफलाइन मानी जाती है. नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल को जोड़ने वाले इस मार्ग पर रोजाना राजधानी और शताब्दी जैसी सैकड़ों हाई-स्पीड ट्रेनें दौड़ती हैं. समाज के लोगों का कहना है कि वे आम जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की बेरुखी उन्हें इस कड़े कदम के लिए उकसा रही है. 2023 में भी इसी मांग को लेकर 12 दिनों तक जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे जाम रहा था, और अब इतिहास दोहराने की तैयारी है.

पुरानी टीस और आगे की रणनीति

आपको बता दें कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़ी इन जातियों ने पहले भी जयपुर विधानसभा के घेराव की कोशिश की थी, लेकिन सरकारी आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था. हालांकि, समाज का एक बड़ा धड़ा इस फैसले से खुश नहीं था और उन्हें लगता है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है. यही कारण है कि अब रणनीति बदलकर सीधे रेल मार्ग को निशाना बनाने की योजना बनाई गई है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके.

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