काला चना: भारी नहीं, बल्कि संतुलित आहार काला चना; मांसपेशियों के लिए संजीवनी

काला चना सिर्फ साधारण दाल नहीं बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने वाला संतुलित आहार है. यह प्रोटीन आयरन और स्थिर ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है जो कमजोरी और थकान से राहत देता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

Health News: अक्सर ऐसा होता है कि भरपेट खाना खाने के बाद भी शरीर में कमजोरी बनी रहती है. थोड़ी मेहनत में थकान महसूस होती है और मांसपेशियों में दर्द रहने लगता है. यह संकेत है कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और पोषण नहीं मिल पा रहा है. केवल पेट भरना सेहत की गारंटी नहीं होता.

भारतीय थाली में प्रोटीन की कमी

भारतीय भोजन में फाइबर और कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर होते हैं लेकिन प्रोटीन की मात्रा कम होती है. यही वजह है कि शरीर अंदर से कमजोर रह जाता है. इस कमी को पूरा करने के लिए काला चना एक बेहतरीन और सस्ता विकल्प है.

तुरंत नहीं, बल्कि स्थिर ऊर्जा देता है काला चना

काला चना तुरंत ताकत देने वाला भोजन नहीं है बल्कि यह धीरे धीरे शरीर को मजबूत बनाता है. यह कमजोरी जल्दी थकान वर्कआउट के बाद रिकवरी की समस्या और पाचन की कमजोरी को दूर करने में मदद करता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती. इसी कारण मधुमेह के मरीज भी इसका सेवन कर सकते हैं.

मांसपेशियों और खून के लिए फायदेमंद

काले चने में प्रोटीन आयरन और मैंगनीज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व मांसपेशियों को मजबूती देने के साथ स्टेमिना बढ़ाते हैं. आयरन खून की मात्रा और गुणवत्ता दोनों सुधारता है. एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए काला चना बेहद लाभकारी माना जाता है.

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आयुर्वेद की नजर में काला चना

आयुर्वेद के अनुसार काला चना मांसधातु वर्धक बल देने वाला और अग्नि को स्थिर करने वाला आहार है. यह केवल वजन नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर को घनत्व ताकत और सहनशक्ति देता है. आम धारणा है कि चना भारी होता है लेकिन सही तरीके से खाने पर यह पाचन को मजबूत करता है और आंतों की सेहत सुधारता है.

सेवन का सही तरीका जानना जरूरी

काले चने को कच्चा खाने से गैस और कब्ज की समस्या हो सकती है. बेहतर तरीका यह है कि रात में एक कटोरी काला चना पानी में भिगो दें. सुबह उसे उबाल लें और हल्के तेल में हींग और जीरे का तड़का लगाकर सेवन करें. सही मात्रा और सही तरीके से खाया गया काला चना शरीर के लिए संजीवनी साबित हो सकता है.

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