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This Article is From Jan 28, 2026

चंद्रभान सिंह और सीपी जोशी के गुट फिर आमने-सामने, बीजेपी के भीतर टकराव बढ़ा; मदन राठौड़ तक पहुंचा मामला

इस मुद्दे पर बीजेपी नेता के घर अंसतुष्ट धड़े की बैठक हुई. बैठक की रणनीति लीक ना हो, इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन को बाहर रखवा दिया गया.

चंद्रभान सिंह और सीपी जोशी के गुट फिर आमने-सामने, बीजेपी के भीतर टकराव बढ़ा; मदन राठौड़ तक पहुंचा मामला
विधायक चंद्रभान सिंह और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी

चित्तौड़गढ़ में निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और सांसद सीपी जोशी के गुटों के बीच तकरार की बात सामने आई. मामला 6 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति से जुड़ा है. इन नियुक्तियों से अंसतुष्ट कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए हैं कि 5 मंडल अध्यक्ष विधायक चंद्रभान सिंह गुट के खेमे से हैं. इसे लेकर सांसद खेमे में जबरदस्त नाराजगी है. नियुक्ति के विरोध में कई कार्यकर्ता-नेता लामबंद हुए और उन्होंने गुप्त बैठक की. इस बैठक में प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. सूत्र बताते हैं कि बैठक से पहले सभी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन को एक थैले में रख दिया गया, ताकि बैठक की रणनीति लीक न हो. बैठक में सियासी चर्चा हुई और मनोनीत मंडल अध्यक्ष पर विरोध जताया गया.  

चंद्रभान सिंह की वापसी के बाद से सियासत गरम 

बता दें कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह का टिकट कट गया था. टिकट कट जाने के बाद आक्या ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में आक्या की जीत हुई और बीजेपी प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी. चुनाव नतीजों के बाद आक्या ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया था. इसके बाद से ही आक्या पार्टी में सक्रिय हैं, जिसके चलते चित्तौड़गढ़ की सियासत भी काफी गरमाई हुई है.

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मदन राठौड़ से भी की मुलाकात

धनेत सरपंच रणजीत सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से भी मुलाकात की. प्रदेश अध्यक्ष ने मामले का समाधान करने का आश्वासन दिया है. अंसतुष्ट खेमे ने 29 जनवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया है. आशंका जाहिर की जा रही है कि अगर मामला नहीं सुलझा तो अंदरूनी खींचतान सड़क पर आ सकती है. हालांकि, इस संबंध में भाजपा के किसी बड़े नेता की कोई खुलकर प्रतिक्रिया सामने नही आई हैं. 

आरोप- नियुक्ति में मापदंड दरकिनार

आरोप है कि इन नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की गई. नियुक्ति में 45 साल की आयु सीमा समेत कई मापदंडों को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया की जानकारी दी. क्षेत्रीय विधायक, सांसद और जिलाध्यक्ष से नाम मांगे गए थे. उनकी सहमति के बाद ही नियुक्ति की गई है.

फैसला बदला तो बिगड़ेगा जातिगत समीकरण

जानकर बताते हैं कि सांसद सीपी जोशी ने इस मामले में कोई नाम नहीं दिया था. इसी के चलते चंद्रभान सिंह गुट बाजी मार गया. अब बीजेपी के सामने बड़ी परेशाानी यह है कि अगर नियुक्तियां का फैसला नहीं बदला गया तो कार्यकर्ता सड़क पर होंगे. जबकि नियुक्त पदाधिकारियों को हटाने की स्थिति में जैन समेत अन्य वर्गों की नाराजगी उठानी पड़ सकती है.

जो नियुक्तियां हुई, वो फाइनल- जिलाध्यक्ष

इस पूरे मामले में जिलाध्यक्ष रतन लाल गाडरी ने पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ असंतुष्ट लोगों ने प्रदेशाध्यक्ष से मुलाकात की है. लेकिन जो नियुक्तियां हुई हैं, वही फाइनल हैं. प्रदेश नेतृत्व जो भी निर्देश देगा, उसकी पालना की जाएगी.

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