राजस्थान में यमुना जल समझौते की क्रियान्वित को लेकर सियासत फिर से तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ने दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात कर यमुना जल समझौते सहित विभिन्न परियोजना को लेकर चर्चा की. इस पर कांग्रेस ने सरकार पर समझौते को लेकर केवल 'बैठकों की राजनीति' करने का आरोप लगाया है.
सीएम ने सीआर पाटिल से मुलाकात की
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि राजस्थान में जल जीवन मिशन की प्रगति, राम जल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते सहित विभिन्न सिंचाई एवं पेयजल परियोजनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार 'हर घर जल' के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की थी.
गोविंंद सिंंह डोटासरा ने सवाल खड़ा किया
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते का MoU हुआ था, लेकिन 29 महीने बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है. डोटासरा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा के पहले सत्र में दावा किया था कि 17 जून 2024 तक दोनों राज्यों की संयुक्त DPR तैयार हो जाएगी, और शेखावाटी के लिए पेयजल परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा, लेकिन अब तक ना DPR बनी और ना ही परियोजना आगे बढ़ सकी.
सरकार पर चुप्पी साधने का लगाया आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि हरियाणा अब समझौते के विपरीत नई शर्तें रख रहा है. पार्टी के मुताबिक, हरियाणा चाहता है कि राजस्थान के लिए जाने वाली पाइपलाइन से पहले उसके गांवों को पानी दिया जाए, जिससे राजस्थान के हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है. कांग्रेस ने इसे राजस्थान के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया.
"जल संकट से जूझ रहा शेखावटी"
डोटासरा का कहना है कि शेखावाटी क्षेत्र लगातार जल संकट से जूझ रहा है, और सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है. उन्होंने सवाल उठाया कि डबल इंजन सरकार होने के बावजूद ढाई साल में परियोजना का कोई ठोस परिणाम सामने क्यों नहीं आया.
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