
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने न्यायपालिका में भयंकर भ्रष्टाचार होने की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि "मैंने सुना है कि कई वकील तो फैसला लिख कर ले आते है और बाद में फैसला वही आता है. यह अदालतों में क्या हो रहा है? चाहे लोअर कोर्ट हो या अपर कोर्ट."
उन्होंने उच्च न्यायलयों में जजों की नियुक्तियों को लेकर भी बात कही. उन्होंने कहा कि आज से 25 साल पहले उच्च न्यायलयों के जजों की नियुक्ति में मुख्यमंत्री रिकमंडेशन देते थे,वो ज़माना हमने देखा है, हम भी सांसद थे, केंद्रीय मंत्री थे, कई सिफारिशें होती थीं, हमने भी जज बनाने के लिए कई सिफारिशें की होंगी, लेकिन जज बनने के बाद मैंने कभी ज़िन्दगी में उनसे (जजों) बात नहीं की.
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अशोक गहलोत
न्यायपालिका में हो रहे कथित भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री गहलोत के इस बयान के बाद राजनितिक गलियारों में हर तरफ चर्चा हो रही तो वहीं विपक्ष भी इसपर बात करने से पीछे नहीं रह रहा.
भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत के इस बयान पर सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि देश के तीसरे स्तंभ न्यायपालिका के पास व्यापक अधिकार संविधान में दिए हैं सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, और अधीनस्थ न्यायालयों के किसी भी न्यायाधीश के आचरण और कर्तव्य पर कोई टीका टिप्पणी नहीं कर सकता. यह बड़े दुर्भाग्य की बात है.