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This Article is From Mar 05, 2026

TRAI अधिकारी बनकर लोगों को लूट रहे साइबर ठग, पुलिस ने जारी की गाइडलाइन

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वीके सिंह ने बताया कि आजकल जालसाज खुद को TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आमजन को अपना शिकार बना रहे हैं.

TRAI अधिकारी बनकर लोगों को लूट रहे साइबर ठग, पुलिस ने जारी की गाइडलाइन

Rajasthan Cyber Fraud: राजस्थान में लगातार साइबर अपराध नए-नए तरीकों से लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं. बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है.  अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वीके सिंह ने बताया कि आजकल जालसाज खुद को TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आमजन को अपना शिकार बना रहे हैं.

कैसे बिछाया जा रहा है ठगी का जाल 

पुलिस अधीक्षक साइबर सेल पुलिस मुख्यालय शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों को ठगने के लिए मुख्य रूप से इन चार तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

डिजिटल अरेस्ट: डर का नया हथियार 

अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस, कस्टम या ईडी का अधिकारी बताते हैं. वे दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है. आपको वीडियो कॉल पर बंधक (डिजिटल अरेस्ट) जैसा माहौल बनाकर डराया जाता है और केस रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती है.

SIM डीएक्टीवेशन और केवाईसी फ्रॉड 

आपके पास मैसेज आता है कि अगले 2 घंटे में आपकी सिम बंद हो जाएगी. केवाईसी अपडेट करने के बहाने अपराधी आपसे फर्जी ऐप डाउनलोड करवाते हैं या लिंक पर क्लिक करवाते हैं. इससे आपका सिम स्वैप हो जाता है और अपराधी कॉल और एसएमएस फॉरवर्डिंग के जरिए आपके बैंकिंग ओटीपी हासिल कर लेते हैं.

मोबाइल टावर का फर्जी लालच 

ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में यह स्कैम तेजी से फैल रहा है. ठग आपकी जमीन पर टावर लगाने के बदले ₹20,000 से ₹50,000 मासिक किराया और लाखों रुपये एडवांस देने का लालच देते हैं. इसके बाद एग्रीमेंट फीस या रजिस्ट्रेशन के नाम पर आपसे पैसे ऐंठ लिए जाते हैं.

फर्जी सरकारी पत्र 

अपराधी ट्राई, सीबीआई या दूरसंचार विभाग (DoT) के फर्जी लोगो और लेटरहेड का उपयोग कर ईमेल या पत्र भेजते हैं. इसमें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है ताकि डर के मारे व्यक्ति उनकी मांगों को मान ले.

खुद को ऐसे बचाएं 

सत्यता जानें: ट्राई कभी भी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर पूछताछ के लिए नहीं जोड़ता और न ही डिजिटल अरेस्ट करता है.
अनजान कॉल से बचें: यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत फोन काट दें.
गोपनीयता बनाए रखें: अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण या ओटीपी कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें.
वेरिफिकेशन जरूरी: टावर इंस्टालेशन से जुड़ी किसी भी जानकारी की पुष्टि दूरसंचार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dot.gov.in पर जाकर करें.

अगर आपके आसपास कोई भी व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो बिना देर किए सूचना हेल्पलाइन 1930, विशेष हेल्पडेस्क 9256001930 / 9257510100, ऑनलाइन पोर्टल https://cybercrime.gov.in, नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन पर दें.

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