Dausa News: राजस्थान के दौसा जिले में स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलती एक बड़ी खबर सामने आई है. कुंडल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों की भारी कमी के एक बार फिर उजागर हो गई है. अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को लेकर CMHO डॉ. सीताराम मीणा का एक कथित ऑडियो वायरल होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. इस ऑडियो ने विभाग की लाचारी और प्रशासनिक विफलता को जगजाहिर कर दिया है.
'उठाकर थोड़ी लाएंगे डॉक्टर'- CMHO की बेबसी
वायरल ऑडियो में CMHO डॉ. सीताराम मीणा खासे नाराज और लाचार सुनाई दे रहे हैं. ऑडियो में वे कह रहे हैं कि “दो डॉक्टर जयपुर से लगाए, दो दौसा से लगाए, लेकिन कोई ज्वाइन करने नहीं आया. हम क्या कर सकते हैं, उठाकर थोड़ी लेकर आएंगे. ऑडियो में वे आगे यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी तरफ से पूरी कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टर आदेशों की पालना नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके हाथ में सिर्फ आदेश देना है, लेकिन डॉक्टर नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं. इस वायरल क्लिप ने पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है.
स्वीकृत 4 डॉक्टर, पर अस्पताल में एक भी नहीं
कुण्डल तहसील मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. जानकारी के अनुसार यहां स्वीकृत चार चिकित्सकों में से एक महिला चिकित्सक डॉ. ज्योति मीणा को 14 जनवरी 2026 से अजीतगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है, जबकि शेष तीन चिकित्सकों डॉ. रोशन जाजोरिया, डॉ. शुभम खंडेलवाल और डॉ. हरिओम मीना उच्च अध्ययन (पीजी) के लिए रिलीव किए जा चुके हैं.
नतीजतन, अस्पताल पूरी तरह डॉक्टर विहीन हो चुका है। मरीजों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है और कई को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। बाद में किसी तरह एक आयुष चिकित्सक के पहुंचने पर इलाज की खानापूर्ति शुरू हो सकी.
CMHO डा सीताराम मीणा के आदेश हुए बेअसर
उच्चाधिकारियों द्वारा CHC में चिकित्सक लगाने के निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन ये आदेश जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए. हालात यह हैं कि आदेश होने के बावजूद अस्पताल में नियमित चिकित्सक की व्यवस्था नहीं हो सकी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
नर्सिंग ऑफिसर लिख रहे दवाइयां , हेल्पर के भरोसे के भरोसे दवाइयां, अन्य पद भी खाली
डॉक्टरों की कमी के चलते आयुष चिकित्सक को ही मरीजों को देखना और दवाइयां लिखने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है. इतना ही नहीं, पिछले करीब दो वर्षों से फार्मासिस्ट का पद भी यहां खाली है, जिसके कारण दवाओं का वितरण भी नर्सिंग ऑफिसर और डीडीसी हेल्पर के भरोसे किया जा रहा है. इससे मरीजों को दवाइयों के सही उपयोग की जानकारी नहीं मिल पा रही.. साथ हीअस्पताल में एलएचवी (LHV) का पद पिछले तीन वर्षों से और एएनएम (ANM) का पद पिछले दो वर्षों से रिक्त है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं.