Deeg News: राजस्थान के डीग जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस का 'ऑपरेशन एंटी-वायरस' काल बनकर टूटा है. एसपी ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में सीकरी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो लोगों को 'हनीट्रैप' (प्यार के जाल) और 'सेक्स्टॉर्शन' (अश्लील वीडियो बनाकर उगाही) के जरिए अपना शिकार बना रहा था. एसएचओ मुकेश चेची की टीम ने कैफ, सुबेदीन, दिलशाद, मुरली, दिलबाग और याहया नाम के 6 ठगों को गिरफ्तार किया है. इन अपराधियों ने मेवात इलाके को साइबर ठगी का गढ़ बना रखा था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने इनके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है.
ऐसे फंसाते थे जाल में
इन ठगों के काम करने का तरीका इतना शातिर था कि कोई भी पढ़ा-लिखा इंसान भी धोखा खा जाए. ये अपराधी 'फेस-स्वैप' (Face-Swap) नाम की तकनीक का इस्तेमाल करते थे. सरल शब्दों में कहें तो, इस ऐप के जरिए ये ठग वीडियो कॉल के दौरान अपना चेहरा बदलकर 'लड़की' जैसा बना लेते थे. सबसे पहले ये चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम से किसी अनजान व्यक्ति को वीडियो कॉल करते. जैसे ही सामने वाला फोन उठाता, स्क्रीन पर एक खूबसूरत लड़की दिखती (जो असल में ठग होता था). बातों-बातों में ये शिकार की अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर लेते थे.
फर्जी पुलिस अफसर बनकर वसूली
वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद असली खेल शुरू होता था. गिरोह का एक सदस्य पीड़ित को फोन करता और खुद को 'बड़ा पुलिस अधिकारी' या 'साइबर सेल का अफसर' बताता. पीड़ित को डराया जाता कि उसकी अश्लील वीडियो पुलिस के पास आ गई है और इसे सोशल मीडिया पर वायरल होने से रोकने के लिए उसे पैसे देने होंगे. बदनामी के डर से लोग अपनी जमा-पूंजी इन ठगों के हवाले कर देते थे. एएसआई हरवीर सिंह की टीम ने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 पर मिली शिकायतों के आधार पर इन ठगों की लोकेशन ट्रैक की गई.
'ऐशो-आराम की जिंदगी' अब जेल में
पुलिस की छापेमारी में इन ठगों के पास से ठगी की कमाई से खरीदी गई दो शानदार लग्जरी कारें और 4 महंगे मोबाइल बरामद हुए हैं. पुलिस अब इनके बैंक खातों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि इन्होंने अब तक कितने करोड़ों रुपये लोगों से लूटे हैं. पकड़े गए आरोपियों से यह भी पूछताछ की जा रही है कि इस सिंडिकेट में और कितने लोग शामिल हैं.
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