Deeg Brij holi Mahotsav: राजस्थान अपनी गौरवशाली संस्कृति और रंगीले मिजाज के लिए विश्व विख्यात है. इसी कड़ी में 'जल महलों की नगरी' के नाम से मशहूर डीग में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित होली महोत्सव की शुरूआत की गई. इस उत्सव में जब रियासतकालीन 2000 फव्वारे एक साथ सक्रिय हुए, तो पूरा महल परिसर होली के रंगों में सराबोर हो उठा. साथ ही इस महोत्सव में देश के कोने-कोने से आए लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि मानों होली पर स्वयं इंद्रधनुष जमीन पर आया हो.
हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों हुए सामिल
पर्यटन विभाग के इस भव्य आयोजन में हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक शामिल हुए. महोत्सव का मुख्य आकर्षण वे 2000 ऐतिहासिक फव्वारे रहे, जो आधुनिक युग में भी तकनीक के लिए एक मिसाल हैं. ये फव्वारे बिना किसी बिजली या मोटर के नहीं बल्कि, केवल ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) के सिद्धांत पर आसमान छूते नजर आए.
भीषण गर्मी के दौरान रियासतकाल में चलाए जाते थे ये फव्वारे
स्थानीय निवासी बच्चू सिंह ने इस प्राचीन इंजीनियरिंग के रहस्य साझा करते हुए बताया कि रियासतकाल में ये फव्वारे महल के लिए 'नेचुरल एसी' का काम करते थे. भीषण गर्मी के दौरान जब इन्हें चलाया जाता था, तो ये महल के तापमान को गिराकर शून्य के करीब ले आते थे. इसी शीतलता और वैभव को महसूस करने के लिए तत्कालीन राजा-महाराजा खास तौर पर ग्रीष्मकाल में इन फव्वारों का संचालन करवाते थे, जिसकी विरासत आज भी पर्यटकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देती है.
बहुरंगी सांस्कृतिक छटा बिखरी नजर आई
डीग महल के परिसर में आयोजित बृज होली महोत्सव केवल फव्वारों के विहंगम दृश्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां राजस्थान की बहुरंगी सांस्कृतिक छटा भी बिखरी नजर आई. उत्सव में कालबेलिया नृत्य और बीकानेरी मूंछों वाले कलाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए.
7 मीटर लंबी मूंछें ने जीता दिल
इस सांस्कृतिक उत्सव में बीकानेर से आए कावड़ लाल चौहान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जो अपनी 200 मीटर लंबी और 10 किलो वजनी विशाल पगड़ी के साथ पहुंचे थे. उनकी 7 मीटर लंबी मूंछें राजस्थान के पारंपरिक गौरव, आन-बान और शान बयां कर रही थीं. अपनी इन लंबी मूंछों के रहस्य और उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कावड़ लाल ने बताया कि वे हर चार वर्ष में पर्यटन विभाग के निमंत्रण पर डीग आते हैं. उनका मुख्य लक्ष्रय नई पीढ़ी को यह संदेश देना है कि दाढ़ी, मूंछ और पगड़ी ही राजस्थान की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान हैं, जिसे सहेजना हम सभी का कर्तव्य है.
भापंग की गूंज और 'बम-बम लहरी' के दोहे
सांस्कृतिक शाम में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध भापंग वादक गफरुद्दीन जोगी ने समां बांध दिया. जब उन्होंने अपने खास अंदाज में 'बम बम लहरी' के दोहे सुनाए, तो दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए. गफरुद्दीन जोगी को करीब 2500 दोहे कंठस्थ हैं, जिनके जरिए वे लोगों को प्राचीन विरासत से जोड़ रहे हैं.