
घर के नौकर और अन्य कर्मचारियों के नाम से शराब की कई दुकानें संचालित कर आबकारी नीति की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में आबकारी पुलिस ने ऐसे लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. दूसरे के नाम से शराब ठेके लेकर भारी बकाया छोड़ने वाले 11 शराब ठेके निरस्त किए हैं. वहीं दो करोड़ से अधिक रुपये विभाग ने जब्त किए हैं. साथ ही 11 अन्य शराब ठेकेदारों सहित 15 मुकदमे दर्ज किए हैं.
छोटे शराब कारोबारियों को शराब ठेकेदार बनाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नई आबकारी नीति लागू की गई थी. इसमें शराब ठेके छोटे स्तर पर एक-एक दुकान का शराब ठेका अलग-अलग व्यक्तियों को आवंटित करने की व्यवस्था की गई है. साथ ही एक व्यक्ति के नाम दो से ज्यादा शराब ठेके नहीं देने का भी प्रावधान है. इस पर बड़े शराब माफियाओं ने अपने नौकरों और अन्य कर्मचारियों के नाम से अनेक दुकान लेकर उन्हें अघोषित रूप से समूह बनाकर चलाना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई जब इन शराब माफियों ने बेनामी नाम से शराब ठेके लेकर इन ठेकों में सुनियोजित रूप से भारी बकाया छोड़ना शुरू कर दिया.
पिछले कई सालों से इस आदत में लगातार वृद्धि हुई. राज्य सरकार ने छोटे शराब कारोबारियों को जो सुविधा कारोबार करने के लिए दी, उनका शराब माफियों ने खुलकर दुरूपयोग किया. आबकारी विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए मंगलवार को 5.85 करोड़ रुपये का बकाया छोड़ने वाले 11 शराब ठेकों को निरस्त कर दिया और इनकी विभाग में जमा 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जब्त कर ली. इन ठेकेदारों ने ये ठेके ऐसे व्यक्तियों के नाम से लिए जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है. जांच में इनके विरूद्ध कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं. इस आधार पर इन ठेकों के वास्तविक मालिकों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है.