किशनगढ़ में चर्चित रिया सैनी सुसाइड केस में अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या-2 ने मृतका के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए गांधीनगर थाना पुलिस को मुख्य आरोपी रितेश सैनी और धनराज सैनी के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं. अदालत ने यह आदेश पीड़ित पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया गंभीर मामला बनता देख पारित किया है.
यह संवेदनशील मामला राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते डिजिटल उत्पीड़न, प्राइवेसी के हनन और ब्लैकमेलिंग के गंभीर संकट को रेखांकित करता है.
ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल
रिया के पिता दिनेश चंद सैनी ने कोर्ट में याचिका दायर की, और कहा कि करीब 2 साल पहले उनकी बेटी रिया सैनी की सगाई पुष्कर निवासी रितेश सैनी से हुई थी. सगाई के बाद दोनों के बीच फोन पर सामान्य बातचीत होती थी. आरोपी रितेश ने कथित तौर पर रिया को अपने विश्वास में लिया, और उसकी कुछ बेहद निजी बातचीत और कॉल रिकॉर्डिंग अपने पास सहेज लीं.
मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया
आरोप है कि इसके बाद रितेश का रवैया पूरी तरह बदल गया. उसने उन्हीं निजी रिकॉर्डिंग के आधार पर रिया को ब्लैकमेल करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया, जिससे वह खुद सगाई तोड़ दे. क्रूरता की हद पार करते हुए आरोपी ने वे रिकॉर्डिंग रिया के परिवार और दूर के रिश्तेदारों को भी सुना दीं, जिससे युवती गहरे सामाजिक और मानसिक अवसाद में चली गई.
चरित्र हनन और सुसाइड
पीड़ित परिवार के अनुसार, 16 मई 2026 को आरोपी रितेश सैनी, उसके परिवार के सदस्य और सगाई कराने वाले मध्यस्थ अचानक रिया के घर पहुंचे. वहां उन्होंने समाज और रिश्तेदारों के सामने रिया के चरित्र पर कीचड़ उछाला, और उसे सरेआम मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. इस घोर अपमान से टूट चुकी रिया ने अपनी मामी को फोन कर इस असहनीय प्रताड़ना की जानकारी दी थी.
लगातार मिल रहे मानसिक टॉर्चर और समाज में हुई बदनामी से आहत होकर रिया ने 18 मई 2026 को एक सुसाइड नोट लिखा और फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.
पुलिस की ढिलाई के बाद कोर्ट की शरण
पीड़ित पक्ष के एडवोकेट मनीष चौहान ने बताया कि इस खौफनाक वारदात के तुरंत बाद पीड़ित पिता ने गांधीनगर थाना पुलिस को नामजद शिकायत दी थी. इसके बाद पुलिस ने मुख्य धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय केवल 'मर्ग' दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. पुलिस के इस टालमटोल वाले रवैए से परेशान होकर परिवार को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
मुकदमा दर्ज करने का आदेश
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को सुनने के बाद गांधीनगर थाना पुलिस को दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर विधि सम्मत कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है. कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से एडवोकेट मनीष चौहान, एडवोकेट नरेंद्र सैनी, एडवोकेट निर्मल सैनी और एडवोकेट मोहम्मद शकील ने पुरजोर पैरवी की. कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब गांधीनगर थाना पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के इस अंदाज की हो रही तारीफ, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल