'तय समय बताएं' पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाई कोर्ट की फटकार, OBC आयोग को भी कड़े निर्देश

राजस्थान निर्वाचन आयोग ने हाई कोर्ट को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव करवाने के निर्देश के पालन में आ रही मुश्किलों के बारे में बताया है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से जुड़ी याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान हाईकोर्ट का पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सख्त रुख नजर आया. कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने और ओबीसी आयोग से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय-सीमा बताने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को होगी. 

कोर्ट ने सख्त लहजा अपनाते हुए राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव को आज न्यायालय में उपस्थित रहने का आदेश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया था इस चुनाव से संबंधित राज्य सरकार के सभी अधिकारी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहें. जिस पर सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन मौजूद रहे. 

Advertisement

निर्वाचन आयुक्त ने क्या कहा?

राजेश्वर सिंह ने कहा कि ओबीसी आयोग ने उन्हें पत्र लिखकर अवगत कराया है कि 14 अगस्त तक वे अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे. हमने चुनाव करवाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. मतदाता सूचियों का प्रकाशन कर चुके हैं. चुनाव में सीटों के आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है. हम दो दिन में चुनाव का नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं. 

वहीं, ओबीसी आयोग के सचिव ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि हमें जो डाटा मिला था. वह रिपोर्ट देने के लिए पूरा नहीं था. इसलिए ओबीसी आयोग सर्वे करवा रहा है. इसके लिए समय की आवश्यकता है. इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब हमने 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे. तब आप 14 अगस्त की तारीख कैसे दे सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि जब 9 मई 2025 को सरकार ने 3 महीने के लिए कमीशन का गठन किया था तो अपने रिपोर्ट क्यों नहीं दी. अगर आपसे काम नहीं होता है तो मना कर दीजिए.

वहीं, कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को कहा कि बिना ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट के भी चुनाव करवाए जा सकते हैं. आपने लॉटरी निकलकर वह प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की? आप क्यों चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें. पहले भी जब हमने 15 अप्रैल की डेट दी थी. तब आपने उसे डेट के बाद का कार्यक्रम जारी कर दिया था, क्या आपको अदालत के आदेश के परवाह नहीं हैं. 

इसके जवाब में राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि माननीय कोर्ट के आदेश के अनुसार हम यह कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी राज्य सरकार को लॉटरी निकालनी होगी. हमें सरकार ने आरक्षण का वर्गीकरण करके नहीं दिया है, अगर सरकार हमें लॉटरी निकालकर दे देती है तो हम दो दिन में चुनाव प्रक्रिया शुरू कर देंगे. हाइकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह रवैया ठीक नहीं है. हमें तारीख चाहिए. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कोर्ट से सोमवार तक का समय मांगा. 

Advertisement

OBC आयोग को तय तारीख बताने के निर्देश

कोर्ट ने इस पर कहा कि ओबीसी आयोग रिपोर्ट पेश करने की एक तय तिथि सोमवार को बताए और वह तारीख 14 अगस्त नहीं हो सकती. साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से लॉटरी निकालने और चुनाव करवाने की तारीख मांगी. साथी कोर्ट ने निर्देश दिया कि सोमवार को सुनवाई के दौरान चुनाव से जुड़े संबंधित सभी अधिकारी मौजूद रहे.

बता दें कि हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को अपने आदेश में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि ग्राम पंचायतों और नगर निकायों सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव हर हाल में 31 जुलाई 2026 तक संपन्न कराए जाएं.  हाई कोर्ट पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर नाखुशी जताता रहा है. हाईकोर्ट की डेडलाइन नजदीक आने के बाद राज्य सरकार ने चुनाव की समय सीमा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था.

Advertisement

इस याचिका पर कल, 15 जुलाई को भी सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा और अभिषेक सिंह देवंदा ने पक्ष रखा. कोर्ट ने उनके तर्कों से सहमति जताते हुए चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर कड़ी टिप्पणी की थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि बार-बार समय सीमा बढ़ाने की मांग को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता. 

ये भी पढ़ें-: भरी पंचायत में 3 लोगों की चाकू गोदकर हत्‍या, व‍िवाद शांत कराने के ल‍िए बुलाई गई थी पंचायत