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This Article is From Jan 17, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवाह से पहले पत्नी को मिली स्कॉलरशिप तो पति को नहीं कर सकते अयोग्य

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप से जुड़े मामले में अहम फैसला देते हुए साफ किया कि विवाह से पहले पत्नी को मिली छात्रवृत्ति के आधार पर पति को योजना से वंचित नहीं किया जा सकता है.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवाह से पहले पत्नी को मिली स्कॉलरशिप तो पति को नहीं कर सकते अयोग्य
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर.

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस स्कीम से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह से पहले पत्नी को मिली छात्रवृत्ति के आधार पर पति को इस योजना के लाभ से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है. 

परिवार की परिभाषा पर स्पष्ट रुख

जस्टिस अनुरूप सिंह ने कहा कि विवाह से पहले महिला अपने पिता के परिवार की सदस्य होती है और विवाह के बाद पति के परिवार का हिस्सा बन जाती है. ऐसे में एक ही छात्रवृत्ति के आधार पर दो अलग अलग परिवारों को अयोग्य मानना न केवल अनुचित है बल्कि योजना के उद्देश्य के भी खिलाफ है.

अमेरिका में पढ़ रहे छात्र का मामला

यह मामला देवेंद्र कुमार कोठारी द्वारा अपने पुत्र प्रखर कोठारी की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है. प्रखर कोठारी अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से MBAi पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम कर रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार की स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप योजना के तहत आवेदन किया था जिसे 19 दिसंबर 2025 को खारिज कर दिया गया.

प्रशासन ने क्यों किया था आवेदन खारिज

प्रशासन ने मौखिक रूप से बताया कि प्रखर की पत्नी आरुषि असावा को 9 सितंबर 2022 को इसी योजना के तहत छात्रवृत्ति मिल चुकी है. योजना की शर्त 9(ii) के अनुसार ई 3 श्रेणी में एक परिवार से केवल एक सदस्य को ही लाभ मिल सकता है इसलिए प्रखर को अयोग्य माना गया.

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरुषि को छात्रवृत्ति विवाह से पहले मिली थी जब वह अपने पिता के परिवार का हिस्सा थीं. प्रखर और आरुषि का विवाह 1 अप्रैल 2023 को हुआ था. छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाओं की व्याख्या संकीर्ण और तकनीकी नहीं होनी चाहिए.

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने कहा कि योजना की शर्तें स्पष्ट हैं और नियमों से बाहर जाकर लाभ नहीं दिया जा सकता. हालांकि कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई. हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 के खारिजगी आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही सरकार और चयन समिति को निर्देश दिए कि प्रखर के आवेदन पर मेरिट के आधार पर नए सिरे से विचार किया जाए.

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