राजस्थान के बालोतरा जिले में बनकर तैयार हुई पचपदरा रिफाइनरी (HPCL Rajasthan Refinery) को लेकर सियासी घमासान थम नहीं रहा है. इस रिफाइनरी का पीएम मोदी 21 अप्रैल को लोकार्पण करने वाले थे, लेकिन लोकार्पण के ठीक एक दिन पहले रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने कई सवाल खड़े दिए. रिफाइनरी में आगे की घटना के बाद विपक्ष ने बड़े सवाल करते हुए सरकार को जमकर घेरा. अब राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा के एक बयान ने नए सियासी घमासान को जन्म दे दिया है. मुख्यमंत्री के बयान के बाद अशोक गहलोत से लेकर टीकाराम जूली समेत कांग्रेस के तमाम नेताओं ने राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया है.
सीएम शर्मा को अशोक गहलोत का जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के दावे पर कहा कि जल्दबाजी में उद्घाटन के चक्कर में हुई दुर्घटना से ध्यान भटकाने और अपनी असफलता छिपाने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री भ्रामक भाषण दे रहे हैं. 26 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल के दावे पर पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि उन्हें शायद जानकारी ही नहीं है कि रिफाइनरी में राज्य सरकार की 26% भागीदारी 2013 में हुए शिलान्यास के समय से ही है. पचपदरा में रिफाइनरी के लिए भारत सरकार और एचपीसीएल ने तब यह शर्त रखी थी कि राज्य सरकार 26% हिस्सेदारी ले, तभी यहां रिफाइनरी बनाई जा सकती है.
जूली बोले- सीएम को जानकारी ही नहीं है...
वहीं, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी को जानकारी ही नहीं है कि रिफाइनरी में राज्य सरकार की 26% हिस्सेदारी शिलान्यास के समय यानी 2013 से ही है. मुख्यमंत्री जी को समझना चाहिए कि सवा दो साल से सरकार होने के बावजूद घोटाले जैसे कोरे आरोप बचकाने लगते हैं. मुख्यमंत्री का काम ऐसे भ्रामक भाषण देकर जनता को गुमराह करना नहीं बल्कि कार्रवाई करना है. इन आरोपों से वो केवल राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति कर रहे हैं. जनता सच जानती है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने क्या कहा था?
रिफाइनरी में 26 फीसदी हिस्से को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाला शर्मा के उस बयान के बाद सियासत शुरू हो गई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि HPCL-राजस्थान ऑयल रिफाइनरी' प्रोजेक्ट में राज्य सरकार को 26 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वजह से मिली थी. सीएम भजनलाल ने चूरू में ‘शौर्य के साथ संकल्प दिवस' कार्यक्रम के बाद एक जनसभा में कहा कि 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान को रिफाइनरी परियोजना में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी दी थी.
रिफाइनरी का कई बार बढ़ा बजट
बता दें कि लगभग 79,459 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनी यह रिफाइनरी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में से एक है. जिसमें 74 फीसदी इक्विटी HPCL के पास और 26 फीसदी इक्विटी राजस्थान सरकार के पास होना तय हुआ था. शुरुआत में 37,000 करोड़ की लागत वाली इस रिफाइनरी का साल 2013 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शिलान्यास किया था. तब भाजपा ने इसे चुनावी स्टंट कहा था. सत्ता बदलते ही, वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने कांग्रेस के मॉडल को 'वित्तीय बोझ' वाला बताकर परियोजना रोक दी.
साल 2017 में नया वित्तीय मॉडल लाया गया, जिससे राज्य का वित्तीय बोझ 56,000 करोड़ से घटकर 40,000 करोड़ हुआ. साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित 43,129 करोड़ के प्रोजेक्ट का औपचारिक शुभारंभ किया. कांग्रेस ने इसे 'पुनः शिलान्यास' कहा. फिर कांग्रेस सरकार आई और अशोक गहलोत सरकार ने इसे 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बताया, लेकिन कोविड-19 और प्रशासनिक कारणों से काम अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका. फिर 2023 में भाजपा की सरकार आई और रिफाइनरी निर्माण के काम में तेजी आई. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रिफाइनरी का 21 अप्रैल को पीएम मोदी के द्वारा लोकार्पण होना था, लेकिन ठीक एक दिन पहले पचपदरा रिफाइनरी के एक हिस्से में आग लगने के कारण कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया.
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