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सड़क पर कहां है सबसे ज्यादा खतरा, एक QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी, पहली बार देश में ऐसी पहल

शुरुआती चरण में दिल्ली रोड, सीकर रोड, दौसा रोड और अजमेर रोड जैसे व्यस्त हाईवे को इसमें शामिल किया गया है. लगभग 1 से अधिक ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें येलो और रेड जोन में बांटा गया है. 

सड़क पर कहां है सबसे ज्यादा खतरा, एक QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी, पहली बार देश में ऐसी पहल
सड़क पर कहां है सबसे ज्यादा खतरा, एक QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी

Rajasthan News: अगर आप किसी अनजान रास्तों पर सफर कर रहे हैं और आपको नहीं पता कि आगे की सड़क कितनी सुरक्षित है या कौन सी जगह ब्लैकस्पॉट है, जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं. तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. अब जयपुर पुलिस ने देश में पहली बार नया नवाचार किया है, जिससे आपको गूगल की सहायता से पता चल जाएगा कि कौन सी जगह या कौन सा चौराहा या मोड़ 'ब्लैक स्पॉट' (सबसे ज्यादा दुर्घटना संभावित क्षेत्र) है. 

QR कोड से मिलेगी जानकारी

आईजी राहुल प्रकाश ने 'मिशन सेफर रोड' के तहत इस डिजिटल सुरक्षा चक्र की शुरुआत की है. इसके लिए एक खास QR कोड जारी किया गया है. इसे स्कैन करते ही चालक के मोबाइल पर आस-पास के सभी ब्लैक स्पॉट की जानकारी आ जाएगी. शुरुआती चरण में दिल्ली रोड, सीकर रोड, दौसा रोड और अजमेर रोड जैसे व्यस्त हाईवे को इसमें शामिल किया गया है.

लगभग 1 लाख से अधिक ब्लैक स्पॉट चिन्हित

लगभग 1 से अधिक ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें येलो और रेड जोन में बांटा गया है. रेड जोन का मतलब सबसे अधिक ख़तरा और येलो ऑरेंज का मतलब सावधानी बरतें. IG राहुल प्रकाश ने बताया कि आने वाले चरण में इसको गूगल मैप से भी जोड़ा जाएगा. अगर कोई ड्राइवर गूगल मैप का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे आने वाले ब्लैक स्पॉट के बारे में पहले से ही जानकारी मिल जाएगी, जिससे होने वाला संभावित सड़क हादसा रोका जा सकता है.

  • येलो जोन (कम रिस्क) - जहां पिछले 3 साल में 10 एक्सीडेंट हुए हों.
  • ऑरेंज जोन (मध्यम रिस्क)- जहां पिछले तीन साल में 10 से 20 एक्सीडेंट हुए हों.
  • रेड जोन (हाई रिस्क)- जहां पिछले तीन साल में 20 से ज्यादा एक्सीडेंट हुए हों.

हाल ही में आईजी राहुल प्रकाश ने रेंज के सभी जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से सर्वे कराया था. इसमें 121 ब्लैक स्पॉट सामने आए हैं, जहां पिछले तीन साल में 1108 लोगों ने जान गंवाई है. इन्हें दुरुस्त कराने के लिए संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जा रही है. इनमें रेड जोन वाले 6 स्पॉट हैं, जहां 162 मौतें, ऑरेंज जोन वाले 37 स्पॉट पर 475 लोगों की मौत हो चुकी है. इसी तरह यलो जोन वाले 78 स्पॉट पर 471 लोगों की मौत हो चुकी है. इस तरह की पहल राजस्थान में पहली बार शुरू हुई है.

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