राजस्थान में जमीन और मकान खरीदना अब और महंगा हो गया है. सरकार की ओर से डीएलसी रेट में बढ़ोतरी के बाद न केवल रजिस्ट्री की लागत बढ़ेगी, बल्कि बाजार में जमीन और प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी असर पड़ेगा. सरकार ने डीएलसी दरों में 5 प्रतिशत से लेकर 49 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है. अधिकांश इलाकों में यह वृद्धि 5 से 20 प्रतिशत के बीच रही है, जबकि जिन क्षेत्रों में डीएलसी रेट बाजार भाव से काफी कम थे, वहां 30 से 49 प्रतिशत तक का बड़ा इजाफा किया गया है. दरअसल, मई महीने में सरकार ने सभी जिलों से नई डीएलसी दरों के प्रस्ताव मांगे थे. जून के अंतिम सप्ताह तक वित्त विभाग ने इन प्रस्तावों पर विचार किया और अब 3 अगस्त से नई दरें लागू कर दी गई हैं. इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी डीएलसी रेट में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी.
ये हैं जयपुर में डीएलसी की नई दरें
राजधानी जयपुर में चारदीवारी क्षेत्र का बापू बाजार सबसे महंगा इलाका बनकर उभरा है. यहां 40 से 60 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित जमीन की डीएलसी दर 5,71,780 रुपए प्रति वर्गमीटर तय की गई है. इसके अलावा रामबाग चौराहे से अजमेरी गेट तक 100 फीट चौड़ी सड़क के दोनों ओर स्थित कॉमर्शियल जमीन की डीएलसी दर अब 3 लाख रुपए प्रति वर्गमीटर हो गई है.
जानिए राजधानी के अन्य इलाकों में क्या रहेंगी कीमतें
पिंकसिटी के कई इलाकों में डीएलसी रेट बढ़ाई गई है. इनमें जमना विहार न्यू (49%), नंदपुरी (48%), मॉडल टाउन और जगतपुरा (48%), जेएलएन मार्ग के आस पास (48%), जवाहर सर्किल टर्मिनल-2 (48%), मदरामपुरा वेस्ट (46%), महेश मार्ग और सी-स्कीम (46%), भारतेंदु नगर (45%), आरपीए रोड स्थित संजय नगर (45%), विकास नगर (एयरपोर्ट) (44%) और सोडाला क्षेत्र की मुख्य हवा सड़क (43%) शामिल हैं.
जयपुर से सटे सैटेलाइट टाउन में भी जमीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चौमूं, चाकसू, कालवाड़, जोबनेर, बगरू, बस्सी, फागी, बिचून और दूदू जैसे क्षेत्रों में कॉमर्शियल जमीन की डीएलसी दरें अब 30 हजार से 50 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई हैं.
चौमूं के आदित्य नगर में कॉमर्शियल जमीन की दर 35,200 से बढ़कर 52,800 रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई है, जबकि अनाज मंडी क्षेत्र में यह 40,700 से 48,840 रुपए प्रति वर्गमीटर के बीच हो गई है.
इससे पहले भी हो चुकी है कई बार बढ़ोतरी
डीएलसी दर वह सरकारी निर्धारित न्यूनतम बाजार मूल्य होता है, जिस पर जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है. यह दर आवासीय और वाणिज्यिक श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग तय होती है और सड़क की चौड़ाई के आधार पर भी इसमें अंतर होता है. जमीन की खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री इसी दर या उससे अधिक पर ही की जा सकती है, जबकि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का निर्धारण भी इसी आधार पर किया जाता है. राज्य सरकार ने दिसंबर 2024 में 5 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि की थी. जबकि 1 अप्रैल 2026 को 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया था.
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