राजस्थान के जैसलमेर में डंपिंग यार्ड में खुले में मिले मृत गौवंश के सैंकड़ों शवों की तस्वीर ने हड़कंप मचा दिया है. जब डंपिंग यार्ड में पड़े गौवंश के शवों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो प्रशासन हरकत में आया. तुरंत जैसलमेर नगर परिषद के आयुक्त ने ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. जब ठेकेदार की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो 2025-26 का ठेका निरस्त करके जमा राशि को जब्त करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. प्रशासन की काफी किरकिरी होने के बाद नगर परिषद की टीम ने डंपिंग यार्ड में पड़े गौवंश के शवों का गड्ढे खुदवाकर निस्तारण करवाया.
शवों के सड़ने से आ रही थी दुर्गंध
दरअसल, जैसलमेर नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में गौवंश के शव कई दिनों से पड़े थे. तेज गर्मी में सड़ते शवों से उठती दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शिकायत भी की. वहीं, रविवार से ही सोशल मीडिया पर सैंकड़ों की संख्या में पड़े गौवंश के शवों की तस्वीरें और वीडियो तैरने लगे. इसके चलते प्रशासन की जमकर किरकिरी भी हुई.
इस पर नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा ने ठेकेदार गोपाराम पुत्र दुदाराम निवासी बाड़मेर को कारण बताओ नोटिस जारी किया. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वर्ष 2025-26 का ठेका निरस्त कर धरोहर राशि जब्त करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. फिर करीब एक माह पुराने 150 से 200 मृत पशुओं का जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर निस्तारण करवाया. पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक ने इसे ठेकेदार की लापरवाही बताया.
कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा
वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस प्रवक्ता विकास व्यास ने कहा कि गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाले अब मौन क्यों हैं, जब जैसलमेर में सैकड़ों मृत गौवंश खुले में पड़े मिले. उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताया. दूसरी ओर भाजपा सोशल मीडिया संयोजक आकाश ओझा ने कहा कि भाजपा के लिए गौमाता पूजनीय है और मामले में तुरंत संज्ञान लेकर निस्तारण करवाया गया. उन्होंने कहा कि यह केवल ठेकेदार की लापरवाही है, विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास नहीं करे. नगर परिषद आयुक्त लाजपाल सिंह सोढ़ा ने बताया कि ठेकेदार गोपराम की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद उसका अनुबंध समाप्त कर दिया गया और उसे काली सूची में डाल दिया गया है.
आयुक्त बोले- कचरा खाने से पशुओं की मौत नहीं हुई
नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाह का भी खंडन करते कहा कि कचरा खाने से पशुओं की मौत नही हुई है. उन्होंने बताया, "ठेकेदार को मृत पशुओं के निस्तारण के लिए डंपिंग यार्ड में जगह आवंटित की गई थी. सामान्य प्रक्रिया के तहत मृत पशुओं को एक-दो दिन सुखाकर गड्ढों में दबाया जाता है, लेकिन ठेकेदार ने 15 से 20 दिन तक शवों को यूं ही पड़ा रहने दिया." अधिकारियों के मुताबिक, सभी शवों को गहरे गड्ढे खोदकर मिट्टी से ढककर सुरक्षित तरीके से दफनाया गया.
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश वारगंटीवार ने कहा कि वीडियो सामने आते ही विभाग ने तुरंत नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह से संपर्क किया और जयपुर स्तर से भी अधिकारियों ने संज्ञान लिया. मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है, लेकिन लापरवाही के कारण शव खुले में पड़े रहे, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा था, प्रशासन और नगर परिषद की संयुक्त टीम ने जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर सभी शवों को दफनाया. डॉ. वारगंटीवार ने माना कि डम्पिंग यार्ड में सैकड़ों गौवंश व अन्य पशुओं के शव थे और यह एक दिन का मामला नहीं बल्कि पिछले करीब एक महीने से उचित निस्तारण नहीं होने का परिणाम था.
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