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जैसलमेर में बकरियों में फैली अज्ञात बीमारी, 7 दिन में 38 की गई जान, पशुपालकों में छाई चिंता

Rajasthan News: जैसलमेर के भादरिया गांव में अज्ञात बीमारी के कारण 38 बकरियों और मेमनों की मौत से हड़कंप मच गया है. पशुपालन विभाग ने 'ET' रोग की आशंका जताई है.

जैसलमेर में बकरियों में फैली अज्ञात बीमारी, 7 दिन में 38 की गई जान, पशुपालकों में छाई चिंता
बकरियों में फैली अज्ञात बीमारी
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Jaisalmer Animal Disease News: राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के लाठी क्षेत्र के भादरिया गांव में बकरियों में फैली अज्ञात बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले एक सप्ताह से बकरियों में फैली एक रहस्यमयी बीमारी ने कहर बरपा रखा है,जिसमें अब तक 28 बकरियों और 10 मेमनों की जान जा  चुकी है, जिससे पशुपालकों के सामने आजीविका को लेकर चिंता और डर का संकट खड़ा हो गया है.

तीन दिन में टूट रही सांसें

पशुपालकों के अनुसार, बीमारी की चपेट में आने के बाद बकरियां तीन-चार दिन तक बीमार रहती हैं और फिर उनकी मौत हो जाती है. गुरुवार को भी एक साथ 7 बकरियों की मौत हो गई. गांव में अभी भी कई बकरियां बीमार हैं, जिससे दहशत का माहौल बना हुआ है.  स्थानीय स्तर पर किए गए उपचार के प्रयास अब तक बेअसर साबित हुए हैं इसलिए पशुपालकों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से चिकित्सा टीम भेजने और प्रभावी उपचार की मांग की है.

विभागीय कार्रवाई और 'ET' रोग की आशंका

मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उमेश वारगंटीवार ने बताया कि सूचना मिलते ही भादरिया के पशु चिकित्सा अधिकारी को मौके पर भेज दिया गया है. बीमार बकरियों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए लैब भेजा गया है. 

इंट्रो टॉक्सेमिया का हो सकता है खतरा

डॉ. वारगंटीवार के अनुसार,  प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर इंट्रो टॉक्सेमिया (ET) रोग की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की पुष्टि हो सकेगी.

क्या है ET और कैसे बचें?

 विशेषज्ञों का कहना है कि ET रोग मुख्यतः असंतुलित आहार और अधिक दाना या फसल अवशेष खाने से होता है. इससे बचाव के लिए पशुओं को संतुलित आहार देना जरूरी है. समय पर टीकाकरण कराना सबसे प्रभावी उपाय है. साथ ही, अचानक चारे में बदलाव न करें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.

टीका लगाने के बाद भी मौत का बना रहता है खतरा

 बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि बीमारी के बाद टीका लगाने से भी मृत्यु का खतरा बना रहता है.

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