Rajasthan News: राजस्थान में जालौर जिले की जसवंतपुरा पंचायत समिति इन दिनों कथित वित्तीय घोटाले को लेकर चर्चा में है. खेरड़, कलापुरा, चांदूर, थूर और तातोल ग्राम पंचायतों में वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक हुए विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है.
शिकायत के अनुसार तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारियों, सरपंचों, तकनीकी कर्मचारियों और पंचायत समिति के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी मस्टरोल तैयार किए गए. इन दस्तावेजों के जरिए काम दिखाकर सरकारी राशि निकाली गई.
बाल श्रमिकों के नाम पर भुगतान का दावा
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मस्टरोल में ठेकेदारों के रिश्तेदारों और यहां तक कि बाल श्रमिकों के नाम दर्ज कर भुगतान दिखाया गया. यदि यह सही साबित होता है तो यह मामला सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं बल्कि बाल श्रम कानून के उल्लंघन का भी बनता है.
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
शिकायतकर्ता का कहना है कि वे पिछले एक साल से लगातार इस मामले को उठा रहे हैं. उन्होंने जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जालौर और जयपुर, संभागीय आयुक्त जोधपुर और पंचायती राज मंत्रालय तक शिकायत भेजी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. आरोप है कि जांच एकतरफा और पक्षपातपूर्ण तरीके से की गई है. पंचायत समिति और तहसील स्तर पर बनी जांच समितियों की रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है.
रिकवरी के बाद भी कार्रवाई नहीं
चौंकाने वाली बात यह है कि जिले की एक अन्य पंचायत में इसी तरह के मामले में 77,620 रुपये की रिकवरी हो चुकी है. इसके बावजूद जसवंतपुरा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
अधिकारियों का जवाब
ग्राम पंचायत अधिकारी का कहना है कि कुछ मामलों में अकाउंट नंबर मिसमैच होने के कारण राशि दूसरे खाते में चली गई थी. जैसे ही गलती का पता चला ठेकेदार ने करीब 1.32 लाख रुपये वापस पंचायत खाते में जमा करा दिए.
शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे और मामले को बड़े स्तर पर उठाएंगे.
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