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राजस्थान: स्कूल की जर्जर बिल्डिंग ध्वस्त, पर नया भवन कब बनेगा? कहीं मंदिर तो कहीं खुले में लगती क्लास

अब तक केवल 15 स्कूल भवनों के लिए लगभग 15.26 करोड़ रुपए की वित्तीय मंजूरी मिल पाई है. बाकी स्कूलों के लिए बजट और निर्माण का इंतजार बढ़ता जा रहा है. विशेष रूप से अकलेरा और मनोहरथाना क्षेत्रों में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है, जहां कई कक्षाएं खुले मैदानों या धार्मिक स्थलों में लगानी पड़ रही हैं.

राजस्थान: स्कूल की जर्जर बिल्डिंग ध्वस्त, पर नया भवन कब बनेगा? कहीं मंदिर तो कहीं खुले में लगती क्लास
कहीं मंदिर में तो कहीं खुले में लगती क्लास

राजस्थान के झालावाड़ जिले में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर स्कूल भवनों को हटाने का कार्य जारी है, लेकिन नए भवनों के निर्माण में हो रहे विलंब के कारण शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में चुनौतियां आ रही हैं. जिले में अब तक 316 असुरक्षित भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है और 154 अन्य को हटाने की प्रक्रिया पाइपलाइन में है. ऐसे में आगामी सत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना है. कुछ ऐसे विद्यालय में भवन न होने के कारण टेंट या सामूदायिक केंद्रों पर स्कूल का संचालन करना पड़ रहा है. 

अब सिर्फ 15 स्कूल बिल्डिंग के लिए बजट की मंजूरी

पिपलोदी स्कूल हादसे के बाद सरकार ने सुरक्षा के मद्देनजर पुराने और खतरनाक ढांचे गिराने के निर्देश दिए थे. विभाग ने इन निर्देशों की पालना में अभियान तो चलाया, लेकिन नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया अभी शुरुआती स्तर पर है. आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 15 स्कूल भवनों के लिए लगभग 15.26 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है.

बाकी स्कूलों के लिए बजट और निर्माण का इंतजार बढ़ता जा रहा है. विशेष रूप से अकलेरा और मनोहरथाना क्षेत्रों में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है, कई स्थानों पर विद्यालयों का संचालन टेंट, सामुदायिक केंद्रों, मंदिरों और अन्य वैकल्पिक स्थानों पर करना पड़ रहा है. अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ इन अस्थाई व्यवस्थाओं में उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बच्चों की जान जोखिम में न डालने के उद्देश्य से इन जर्जर भवनों को गिराना अनिवार्य था.

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कई जगह प्रभावित हो सकती है बच्चों की पढ़ाई

विभाग ने नए निर्माण के लिए आवश्यक प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेज दिए हैं और जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि नए सत्र से पहले निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ता, तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षण व्यवस्था पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है. प्रशासन अब प्राथमिकता के आधार पर इन स्कूलों के लिए सुरक्षित और स्थाई समाधान तलाशने में जुटा है.

झालावाड़ के जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा ने बताया कि पिपलोदी का जो स्कूल था, उसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये का बजट हमें मिल चुका है, उसका निर्माण कार्य छत के स्तर पर आ गया है और आगे एक डेढ़ महीने में काम पूरा हो जाएगा. इसके अलावा विभाग के द्वारा जो भी स्कूल के जर्जर भवन थे, उनको जमीदोज कर दिया गया है. साथ ही जहां पर नामांकन अधिक है, बच्चे दूरी पर स्कूल के लिए जाते हैं. वहां पर 15-15 लाख रुपये की राशि की मदद से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है.

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