Rajasthan News: राजस्थान के जोधपुर जिले के पाल गांव स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa) की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. पिछले 11 दिनों से जिस फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट (FSL Report) का इंतजार किया जा रहा था, वह अब आ चुकी है. इस रिपोर्ट ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें जहर दिए जाने की आशंका जताई जा रही थी.
क्या हुआ था 28 जनवरी को?
बीती 28 जनवरी को पाल गांव आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक बिगड़ी थी. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया और विसरा (Visera) जांच के लिए सैंपल भेजे थे.
FSL रिपोर्ट में क्या निकला?
करीब 11 दिनों के इंतजार के बाद आई FSL रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के जहर (Poison) की पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में किसी भी तरह के अप्राकृतिक कारणों के संकेत नहीं मिले हैं.
SIT की रिपोर्ट क्या कहती है?
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित SIT (विशेष जांच दल) ने आश्रम के सीसीटीवी फुटेज और वहां मौजूद लोगों के बयानों की गहनता से पड़ताल की थी. शुरुआती जांच में किसी बाहरी हस्तक्षेप या साजिश के सबूत नहीं मिले हैं.
अब आगे क्या?
FSL रिपोर्ट आने के बाद अब गेंद मेडिकल बोर्ड के पाले में है. विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल बोर्ड अब अपनी अंतिम राय (Final Opinion) देगा, जिससे यह साफ हो पाएगा कि मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था.
साध्वी प्रेम बाईसा के बारे में जानिएएक छोटे से गांव से निकलकर सोशल मीडिया की 'बाल साध्वी' बनने तक का उनका सफर जितना प्रभावशाली था, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी रहा. बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली प्रेम बाईसा का जीवन संघर्षों से शुरू हुआ. जब वे मात्र दो साल की थीं, तभी उनकी माता अमरू बाईसा का निधन हो गया. ट्रक ड्राइवर पिता विरमनाथ ने उन्हें अध्यात्म की राह दिखाई और वे उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले आए. यहां संत राजारामजी महाराज और संत कृपारामजी महाराज के सानिध्य में उन्होंने भजनों और भागवत कथा वाचन की शिक्षा ली. अपनी सौम्य छवि और सुरीली आवाज के कारण वे जल्द ही घर-घर में लोकप्रिय हो गईं. गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर उन्होंने जोधपुर के पाल रोड पर 'साधना कुटीर' आश्रम की स्थापना की, जिसके उद्घाटन में योग गुरु बाबा रामदेव समेत कई दिग्गज संत पहुंचे थे. पैतृक गांव परेऊ में भी उन्होंने एक भव्य आश्रम बनवाया था.
विवाद जिसने बदली जीवन की दिशाप्रेम बाईसा का जीवन तब विवादों के घेरे में आया जब पैतृक गांव में जमीन को लेकर परिजनों से विवाद पुलिस की चौखट तक पहुंचा. लेकिन सबसे बड़ा मोड़ जुलाई 2025 में आया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में उन्हें एक व्यक्ति के साथ दिखाया गया था, जिसे लेकर समाज और अनुयायियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई. हालांकि उन्होंने अपना पक्ष रखने की कोशिश की, लेकिन इस घटना ने उनकी छवि पर जो गहरा घाव दिया, उससे वे अंदर तक टूट गई थीं. समर्थकों का मानना है कि इसी मानसिक दबाव ने उन्हें एकांत की ओर धकेल दिया था.
आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट ने बढ़ाया सस्पेंसउनकी मृत्यु के बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें लिखा था कि उन्होंने अपना जीवन 'सनातन धर्म' के लिए समर्पित कर दिया है. पोस्ट में 'न्याय मिलने की उम्मीद' की बात भी कही गई थी. इस रहस्यमयी पोस्ट और हनुमान बेनीवाल जैसे नेताओं द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग ने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया.
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