Kirodilal Meena letter: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से पेपर लीक का मुद्दा गरमा गया है. कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीणा ने सरकार को पत्र लिखा. इस पत्र में आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा से जेल में मुलाकात का पूरा ब्यौरा है. साथ ही उन्होंने बाबूलाल कटारा को सरकारी गवाह बनाने की संभावना पर भी विचार करने का भी सुझाव दिया. उनका दावा है कि बाबूलाल कटारा ने उन्हें कई चौंकाने वाली बात भी बताई है. साथ ही कहा कि साधारण आदिवासी परिवार से होने के कारण बाबूलाल कटारा को अकेले ही निशाना बनाया जा रहा है. पूरे मामले को ऐसे बनाया जा रहा है, जैसे सारा फर्जीवाड़ा उसने ही किया हो.
जानिए सरकार को लिखे पत्र में क्या है

किरोड़ीलाल मीणा के मुताबिक, "बाबूलाल कटारा ने बोला कि भर्तियों में फर्जीवाड़ा कर युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और सपनों का सौदा करने वाले बड़े मगरमच्छ आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. कटारा ने यह भी कहा कि डॉक्टर साहब, आपने भर्तियों में फर्जीवाड़े को लेकर जो भी सार्वजनिक रूप से कहा था. वह सब सच था. जब-जब आप बोलते थे, आयोग में खलबली मच जाती थी." कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बाबूलाल कटारा ने आयोग में तत्कालीन अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय, कार्यवाहक अध्यक्ष और सदस्य शिव सिंह राठौड़ और अन्य सदस्यों पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया है.
इन 3 लोगों पर लगाए गंभीर आरोप
बाबूलाल कटारा ने मंत्री को बताया कि वह पहले ही एसओजी को इस बात के पुख्ता सबूत सौंप चुका है कि दीपक उप्रेती, शिव सिंह राठौड़ और संजय श्रोत्रिय ने आयोग में अपने-अपने कार्यकाल के दौरान ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं में बड़े स्तर पर अंकों में फेरबदल कर योग्य अभ्यर्थियों के साथ गंभीर धोखाधड़ी की है.
कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
कैबिनेट मंत्री ने कटारा से मुलाकात का हवाला देते हुए कहा, "किस अभ्यर्थी को साक्षात्कार में कितने अंक देने हैं, यह पहले से तय किया जाता था. बाबूलाल कटारा ने कहा कि जब साक्षात्कार में अंकों का खुला खेल हो सकता है, तो ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं में फर्जीवाड़ा क्यों नहीं हो सकता."
यहां देखिए लेटर की अहम बातें


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