Rajasthan News: राजस्थान के जोधपुर शहर इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है. हालात इतने विकट हो चुके हैं कि शहर के पास मात्र दो दिन का ही पानी बचा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की खंडपीठ ने सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है.
43 में से 19 बांध सूखे
जोधपुर के 43 बांधों में से 19 पूरी तरह सूख चुके हैं और अन्य जलाशयों में पानी का स्तर न्यूनतम है. इंदिरा गांधी नहर से जलापूर्ति में बाधा आने के बाद शहर की 20 लाख की आबादी अब टैंकरों और ट्यूबवेलों पर निर्भर है. इस संकट के बीच पानी की कालाबाजारी और टैंकर माफिया का अवैध धंधा फल-फूल रहा है.
प्राचीन धरोहरों पर खतरा
अदालत ने केवल वर्तमान संकट ही नहीं बल्कि जोधपुर की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर—गुलाब सागर, फतेहसागर और तुरजी का झालरा जैसी जल संरचनाओं के प्रति भी गहरी चिंता व्यक्त की है. इन स्थानों पर सीवरेज और कचरा डाले जाने से इनका अस्तित्व खतरे में है. कोर्ट ने कहा कि राजस्थान की इन पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण पर्यावरण के लिहाज से बहुत जरूरी है.
कोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह तत्काल प्रभाव से जल विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाए. यह समिति 'मास्टर वाटर सिक्योरिटी, रिस्टोरेशन एंड कंजर्वेशन प्लान' तैयार करेगी. साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल स्रोतों से तुरंत अतिक्रमण हटाया जाए और पानी की अवैध चोरी व कालाबाजारी पर सख्ती से लगाम लगाई जाए. कोर्ट ने भूजल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन को लेकर भी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को तय की गई है.
यह भी पढ़ें- SI Paper Leak: RPSC अध्यक्ष कटारा के ड्राइवर ने बेटे को पास कराने के लिए रची थी साजिश, SOG ने किया गिरफ्तार