Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले की जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक इस बार हंगामे की भेंट चढ़ गई. बैठक में डांग विकास योजना में हुए करोड़ों के कथित घोटाले, सिंचाई विभाग की मिलीभगत और चंबल प्रोजेक्ट की विफलताओं को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को जमकर आड़े हाथों लिया. विधायकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गई तो यह बात विधानसभा और मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी.
डांग घोटाले की जांच में अधूरी कार्रवाई
राज्य स्तरीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि वर्ष 2005 से 2023 के बीच डांग विकास योजना के बजट में 3.42 करोड़ रुपये की भारी हेराफेरी हुई है. इस मामले में पूर्व सीईओ और परियोजना अधिकारी समेत पांच कार्मिकों को दोषी पाया गया था.
विधायक दर्शन सिंह गुर्जर और सपोटरा विधायक हंसराज मीना ने नाराजगी जताई कि दोषियों से अब तक वसूली नहीं की गई है. विधायकों का आरोप है कि बड़ी मछलियों को बहाल कर दिया गया और केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है.
सिंचाई विभाग और भू-माफियाओं का गठबंधन
विधायक दर्शन सिंह गुर्जर ने सिंचाई विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की बेशकीमती जमीन भू-माफियाओं के हवाले कर दी गई है. सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से अवैध प्लॉटिंग हो रही है और अधिकारी आंखें मूंद कर बैठे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी जमीन को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए अन्यथा दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
अधिकारियों को मिलेगा नोटिस
मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखन सिंह ने बताया कि करौली जिले में योजना के कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं और अनुशासनहीनता पाई गई थी. जिसमें तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी महावीर प्रसाद नायक और परियोजना अधिकारी-लेखा मुंशी लाल मीना के सेवानिवृत्त होने के कारण उनके विरुद्ध प्रकरण समाप्त कर दिया गया है.
वहीं प्रकाश चंद मीना (अधिशाषी अभियंता),रविन्द्र कुमार मीना (सहायक लेखाधिकारी-I),विष्णुदत्त शर्मा (अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी) इन तीनों कार्यरत कार्मिकों के खिलाफ सीसीए नियम-17 के तहत नोटिस दिए जाएंगे.
"पानी दो-पानी चाहिए" चंबल प्रोजेक्ट पर तीखे तेवर
पीने के पानी की समस्या को लेकर विधायक ने "पानी दो-पानी चाहिए" का नारा बुलंद किया. उन्होंने चंबल परियोजना की विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नादौती के मोहनपुर जैसे क्षेत्रों में ही पानी नहीं पहुंच रहा तो बाकी जिले का क्या हाल होगा? जनता प्यासी है और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं.
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