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उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल की चौंकाने वाले रिपोर्ट, 62 फीसदी महिलाएं कुपोषित, एनीमिया के आंकड़े भी चिंताजनक!

पिछले कुछ वर्षों के दौरान कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट स्टडी की गई. इनमें प्रमुख कारण मां में खून की कमी एवं मां कुपोषित होना पाया गया. Mother's day पर मांओं की सेहत से जुड़ी खास रिपोर्ट.

उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल की चौंकाने वाले रिपोर्ट, 62 फीसदी महिलाएं कुपोषित, एनीमिया के आंकड़े भी चिंताजनक!
उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल का वार्ड.

आज मदर्स डे पर बात उन मांओं की, जो उदयपुर के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल में कुपोषण से जूझ रही है. हीमोग्लोबिन की कमी के चलते इन मां का कमजोर स्वास्थ्य चिंता का विषय़ है. महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के आंकड़ें चौंकाने वाले हैं. हॉस्पिटल के कुपोषण वार्ड में साल 2021 से 2025 तक के आंकड़े जारी किए गए. हीमोग्लोबिन जांच के आंकड़ों में भी एनीमिया की गंभीर समस्या सामने आई. कुल 3269 माताओं में से केवल 403 यानी कि सिर्फ 13 प्रतिशत माताओं का हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य पाया गया. अन्य सभी महिलाओं में खून की कमी पाई गई. वहीं, 2 हजार 253 महिलाएं हल्के एनीमिया, 518 मध्यम एनीमिया और 78 गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाई गईं.

3 हजार से ज्यादा महिलाओं की जांच

हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ आरएल सुमन ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कुल 3269 माताओं का परीक्षण किया गया, जिनमें से 2027 यानी 62 प्रतिशत माताएं कम वजन श्रेणी में पाई गईं. सामान्य वजन वाली माताओं की संख्या 1130 यानी कि 35 प्रतिशत ही रही, जबकि अधिक वजन एवं मोटापे से ग्रसित माताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही. यह स्थिति दर्शाती है कि बड़ी संख्या में माताएं अभी भी कुपोषण और कमजोर स्वास्थ्य से जूझ रही हैं. 

बच्चों में भी कुपोषण की शिकायत बढ़ी

बाल चिकित्सालय में भर्ती कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट जांची गई. डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों के अनुभव के आधार पर बच्चों में कुपोषण का प्रमुख कारण मां में खून की कमी एवं मां कुपोषित होना पाया गया. इसी को आधार मानते हुए सभी माता की कुपोषण का स्तर यानी कि वजन, लंबाई, बॉडी मास इंडेक्स और साथ ही हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है. जिन माताओं में खून की कमी है, उनको इलाज के तौर पर एवं जो नॉर्मल हीमोग्लोबिन वाली माताओं को बचाव के तौर पर आयरन की दवाई दी जाती है. 

राजस्थान का ऐसा पहला वार्ड...

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यह राजस्थान का पहला संस्थान है, जहां पर बच्चों के वार्ड में भी माता का ख्याल रखा जाता है. साथ ही माताऔ को अस्पताल द्वारा दो टाइम का भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने आमजन से अपील की कि परिवार एवं समाज में माताओं के पोषण, स्वास्थ्य जांच और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ एवं सशक्त बन सकें.

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