Rajasthan News: राजस्थान में सूरज के तीखे तेवर अब जानलेवा साबित होने लगे हैं. बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र के खेजड़ियाली गांव से एक ऐसी हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. यहां पानी की तलाश में भटक रही एक बेजुबान ऊंटनी की प्यास बुझाने की कोशिश उसकी मौत का कारण बन गई.
जीएलआर के पास प्यास बुझाने की जद्दोजहद
भीषण गर्मी और सूखे कंठ के साथ यह ऊंटनी तेजसिंह की ढाणी के पास बने जीएलआर (Ground Level Reservoir) तक पहुंची थी. होदी में पानी कम होने के कारण उसने गहराई तक जाने की कोशिश की और इसी दौरान उसकी गर्दन नल और पाइप के बीच बुरी तरह फंस गई. तड़प-तड़प कर इस बेजुबान ने दम तोड़ दिया. यह घटना केवल एक जीव की मौत नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में गहराते जल संकट का खौफनाक चेहरा है.
'जलदाय विभाग की लापरवाही भारी'
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जलदाय विभाग की अनियमित आपूर्ति के कारण पशुधन भटकने को मजबूर है. लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में जितनी पानी की खपत है उसके मुकाबले सप्लाई बेहद कम है. लोग महंगे दामों पर पानी के टैंकर डलवा रहे हैं लेकिन मवेशियों के लिए पानी का प्रबंध करना अब उनके वश से बाहर होता जा रहा है. सार्वजनिक हौदियां और जीएलआर सूखे पड़े हैं जिसके चलते मवेशी मौत के मुंह में समा रहे हैं.
सरकारी दावे बनाम धरातल की हकीकत
प्रशासन और विभाग की ओर से गांवों में टैंकरों के जरिए जलापूर्ति के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन धरातल पर ये इंतजाम ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं. बढ़ते तापमान और आने वाले दो महीनों की चुनौतियों को देखते हुए अगर पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो इंसानों के साथ-साथ पशुधन पर भी बड़ा खतरा मंडरा सकता है.
जलदाय विभाग का पक्ष
मामले को लेकर जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता (SE)बाबूलाल मीणा का कहना है कि समदडी क्षेत्र के उम्मेदसागर धवा,कल्याणपुर-खण्डप परियोजना से सप्लाई दी जा रही है,अधिकांश गांव JJM से जुड़े है,सात दिन के अंतराल से सप्लाई दी जा रही है. वहीं अगर कही समस्या ज्यादा है तो पानी के टैंकर द्वारा सप्लाई की जाएगी.