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This Article is From Feb 23, 2026

Rajasthan: मकराना में कबूतरों पर लाखों का दांव, व्हाट्सएप ग्रुप से आयोजित होती थीं अवैध प्रतियोगिताएं

मकराना में करीब 500 कबूतरबाज सक्रिय बताए जाते हैं. “पीजन लवर” नाम से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रतियोगिताओं की घोषणा की जाती है और प्रतिभागियों से एंट्री फीस ली जाती है.

Rajasthan: मकराना में कबूतरों पर लाखों का दांव, व्हाट्सएप ग्रुप से आयोजित होती थीं अवैध प्रतियोगिताएं

Didwana News: डीडवाना जिले के मकराना में बेजुबान परिंदों के साथ खतरनाक कबूतरबाजी, रेसिंग और फाइट का अवैध खेल लंबे समय से चल रहा था. कबूतरबाज कबूतरों के जरिए रेस और लड़ाई करवाकर हजारों से लाखों रुपए तक की कमाई कर रहे थे. इसके लिए बाकायदा इश्तिहार जारी कर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं. मामले का खुलासा होने के बाद जयपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 42 कबूतर बरामद किए.

मकराना जैसे छोटे शहर में कबूतरों पर सट्टेबाजी का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. बड़ी संख्या में लोग कबूतर पालते हैं और उन्हें रेसिंग व फाइट प्रतियोगिताओं में शामिल करते हैं. घरों की छतों पर कबूतरखाने बनाए जाते हैं, जहां कबूतरों को विशेष तरीके से रखा और प्रशिक्षित किया जाता है. उन्हें दाना-पानी और दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन क्रूरता यह है कि नए कबूतर लाने पर अक्सर उनके पंख काट दिए जाते हैं और लंबे समय तक पिंजरे में बंद रखा जाता है ताकि वे अपने पुराने ठिकाने को भूल जाएं.

कबूतरों की कीमत 2 हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक

इन कबूतरों को टोंक, जयपुर, नागौर और मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से लाया जाता है. विभिन्न प्रजातियों के कबूतरों की कीमत 2 हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक होती है. परिवहन के दौरान इन्हें गत्ते के डिब्बों में भरकर बसों और ट्रेनों से लाया जाता है, जिसके बाद इन्हें पिंजरों में कैद कर प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाता है.

“पीजन लवर” नाम से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप

मकराना में करीब 500 कबूतरबाज सक्रिय बताए जाते हैं. “पीजन लवर” नाम से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रतियोगिताओं की घोषणा की जाती है और प्रतिभागियों से एंट्री फीस ली जाती है. तय दिन कबूतरों को उड़ाया जाता है और जो कबूतर सबसे ज्यादा देर तक उड़कर अंत में वापस लौटता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है. कई जगह कबूतरों की आपस में लड़ाई भी करवाई जाती है. पहचान के लिए उनके पैरों में टैग लगाए जाते हैं, जिनसे विजेता तय किया जाता है.

अधिकांश कबूतरबाज कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए

मामले की पड़ताल के दौरान अधिकांश कबूतरबाज कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए और कई लोगों ने अपने घरों की छतों से पिंजरे हटा दिए. हालांकि एक कबूतरबाज ने स्वीकार किया कि प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, लेकिन उसने क्रूरता के आरोपों से इनकार करते हुए इसे केवल शौक और मनोरंजन बताया. उसका कहना था कि वह वर्षों से कबूतर पाल रहा है और हर माह हजारों रुपए खर्च करता है.

जयपुर पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से कबूतरों को मुक्त करवा दिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है. पुलिस को आशंका है कि मकराना सहित आसपास के क्षेत्रों में कबूतरबाजी के नाम पर सट्टेबाजी, फाइट और तस्करी का बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है. पूछताछ के जरिए पुलिस अब इस अवैध गतिविधि से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

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