सिरोही की माउंट आबू में एक ऐसी गुफा है, जहां पर पांडव ने माता कुंती के साथ अज्ञातवास के दौरान पूजा की थी. इस गुफा में पांच शिवलिंग स्थापित हैं, जिनकी स्थापना पांडवों ने ही की थी. यहां माता अर्बुदा की गुफा, संकट मोचन हनुमान भी हैं और अन्य देवी-देवता भी अलग-अलग गुफाओं में विराजमान हैं. आज से शिवरात्रि का पर्व शुरू हो रहा है और 3 दिन तक देश के कोने-कोने से भक्त यहां दर्शन करने पहुंचेंगे. महाशिवरात्रि के मौके पर पढ़िए पांडव गुफा पर रिपोर्ट.
वर्षों तक विलुप्त था मंदिर का इतिहास
ऐसा कहा जाता है कि मंदिर का इतिहास करीब 5 हजार वर्ष पुराना बताया जाता है. यह वर्षों तक विलुप्त था, जिसका जीर्णोद्धार महंत रतनगिरी ने करवाया था. मंदिर परिसर में उनकी समाधि और प्रतिमा भी स्थापित है. यह मंदिर अब देशभर से आने वाले साधु संतों का आश्रम बन गया है. भक्त दूर-दूर से इस प्राचीन स्थान पर आकर दर्शन करते हैं और साधु संतों के आशीर्वाद लेते हैं.

पांडवों ने ही की थी शिवलिंग की स्थापना
माउंट आबू के पांडव गुफा ने इतिहास के पन्नों को जीवंत कर दिया है. यह रहस्यमयी गुफा, प्राचीन शिव मंदिर और पहाड़ों में 33 कोटी देवी-देवताओं का वास इस पवित्र भूमि को और भी आकर्षक बनाता है. गुफा के महंत डूंगरगिरी ने बताया कि यह पवित्र स्थान पांडवों के अज्ञातवास के रुप में जाना जाता है. यहां पांडवों ने पूजा-अर्चना भी की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी.
24 घंटे प्रज्जवलित रहती है धूणी
मान्यता है कि माता कुंती चामुंडा माता की पूजा करती थीं. पहाड़ी के नीचे एक अन्य स्थान पर भी एक गुफा है, जहां माता कुंती रहा करती थीं. अब इन गुफाओं में साधू-संत विश्राम करते हैं. मंदिर परिसर में हनुमानजी और नंदी के स्वरूप भी मौजूद हैं. यहां हनुमान प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि एक विशाल पत्थर पर ही उनकी छवि बनाई गई है. पांडवों के बाद यह स्थान ऋषि-मुनियों की तपोस्थली बन गई, जहां आज भी 24 घंटे धूणी प्रज्जवलित है.
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