Gaurvi Kumari and Padnaab singh at met gala look: फैशन की दुनिया का 'ऑस्कर' कहे जाने वाले मेट गाला 2026 (Met Gala 2026) में इस बार भारत की शाही चमक देखने को मिली. रेड कार्पेट पर जहां दुनिया भर के सितारे अपने अतरंगी लिबासों से सुर्खियां बटोर रहे थे, वहीं जयपुर राजघराने की राजकुमारी गौरवी कुमारी और महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने अपनी ऐतिहासिक विरासत और एलिगेंस से महफिल लूट ली.
महारानी गायत्री देवी की साड़ी में राजकुमारी गौरवी
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यादें और 'जयपुर पिंक' का जादू
राजकुमारी गौरवी कुमारी ने अपने मेट गाला डेब्यू (Met Gala Debut) के लिए किसी आधुनिक ड्रेस को नहीं, बल्कि अपनी दादी और जयपुर की पूर्व महारानी गायत्री देवी (Maharani Gatyri devi) की विरासत को चुना. उन्होंने प्रसिद्ध डिजाइनर प्रबल गुरुंग (Prabal Guru) के जरिए तैयार किया गया एक अनूठा गाउन पहना, जिसे गायत्री देवी की आइकोनिक 'विंटेज शिफॉन साड़ी' (vintage shiffon sarree) से बनाया गया था.
इस लुक की सबसे खास बात इसका 'जयपुर पिंक' रंग था. गौरवी ने अपनी भावनाओं को शेयर करते हुए कहा कि इस गाउन में मेरी दादी की साड़ी की आत्मा और भावनाएं आज भी जीवित हैं. मोतियों की लेयर्ड ज्वेलरी और 'कान चेन' वाला श्रृंगार सीधे तौर पर महारानी गायत्री देवी के सिग्नेचर स्टाइल को श्रद्धांजलि है.
पद्मनाभ सिंह के आउटफिट
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पद्मनाभ सिंह के आउटफिट में दिखी 600 घंटों की मेहनत
वहीं, जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह का लुक राजस्थानी कारीगरी का एक जीवंत दस्तावेज नजर आया. उन्होंने यश और आशिमा ठोलिया के जरिए डिजाइन किया गया 'फुलगर स्टाइल' क्विल्टेड कोट पहना हुआ है. इस कोट को बनाने में 20 कारीगरों ने 600 से ज्यादा घंटे दिए. इसका डिजाइन सिटी पैलेस के श्रीनिवास महल की फ्रेस्को पेंटिंग्स से प्रेरित था. कोट के पीछे बना 'सन मोटिफ' (सूर्य का प्रतीक) उनके सूर्यवंशी होने के गौरव को दर्शाता है.
पद्मनाभ लुक को 'फुलगर स्टाइल'
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ज्वेलरी में दिखा राजसी वैभव
पद्मनाभ के लुक को ‘रानीवाला 1881' के ब्रोच और बटन सेट ने कर बेहद सुंदर और एलिंगेट बनाया गया. उनके कोट पर जड़ा ‘गजराज' (हाथी) ब्रोच शक्ति का और ‘मत्स्य' (मछली) ब्रोच समृद्धि का प्रतीक बना. रूबी, पन्ना और पोल्की से जड़े इन गहनों ने साबित कर दिया कि राजस्थानी विरासत आज भी ग्लोबल फैशन में बेहतर है.
उनके इस डेब्यू के साथ, गौरवी और पद्मनाभ ने यह स्पष्ट कर दिया कि मेट गाला केवल कपड़ों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और संस्कृति को दुनिया के सामने गर्व से रखने का एक मंच है, जिसपर उन्होंने अपनी विरासत को बेहतरीन तरीके प्रदर्शित कर दुनिया में जयपुर घराने के साथ साथ देश का मान बढ़ाया.