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This Article is From Feb 19, 2026

Rajasthan: 'मैला ढोना मंजूर किया..पर धर्म नहीं बदला', जोधपुर में संत उमेश गिरी बोले- घर वापसी करने वालों से हमें कोई फायदा नहीं

संत ने युवाओं को सनातन की शक्ति को 'करंट' की तरह महसूस करने की सलाह दी और राममय होते भारत पर अपनी बेबाक राय रखी. पढ़िए, धर्मांतरण के लालच और घर वापसी पर उन्होंने क्या कहा.

Rajasthan: 'मैला ढोना मंजूर किया..पर धर्म नहीं बदला', जोधपुर में संत उमेश गिरी बोले- घर वापसी करने वालों से हमें कोई फायदा नहीं
घर वापसी' और धर्मांतरण पर संत उमेश गिरी का अब तक का सबसे तीखा बयान दिया है.
NDTV Reporter

Rajasthan News: मध्यप्रदेश के राज्यसभा सांसद और प्रख्यात संत उमेश गिरी महाराज गुरुवार को जोधपुर प्रवास पर रहे. सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने सनातन धर्म की शक्ति, धर्मांतरण के बढ़ते खतरे और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सनातन की शक्ति को 'करंट' की तरह छूकर महसूस करने की जरूरत है.

'लालच से बदला धर्म टिकता नहीं'

धर्मांतरण के मुद्दे पर संत उमेश गिरी ने कहा कि आजकल धन, संपत्ति और जमीन का लोभ देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जो महज दबाव और लालच का विषय है. उन्होंने वाल्मीकि समाज का उदाहरण देते हुए कहा, 'हमारे देश में वाल्मीकि समाज के लोगों ने मुस्लिम शासन में पायखाने साफ करना और सिर पर मैला ढोना स्वीकार कर लिया, लेकिन अपना धर्म नहीं बदला. उन्होंने ही सनातन धर्म को बचाए रखा है. जो लोग लोभ-लालच में आकर धर्म बदल रहे हैं, वे कभी सनातन की शक्ति को समझ नहीं पाएंगे.'

पाश्चात्य सभ्यता बनाम सनातन की 'पावर'

सांसद ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता का आकर्षण क्षणिक है. उन्होंने एक अनूठा उदाहरण देते हुए कहा, 'जैसे हम अर्थी और करंट को छूकर देखते हैं, वैसे ही प्रत्येक भारतीय को सनातन की पावर को छूकर देखना चाहिए. जब आप इसमें प्रवेश करेंगे, तभी आपकी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ हो पाएगी.'

'राममय हुआ देश, हर बस्ती अब अयोध्या'

अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना पर उन्होंने कहा कि अब देश का हर गांव और शहर अयोध्या बन गया है. लोगों का मन राममय है. उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से जो मर्यादा का सूत्र दिया, राम जी ने उसे जीकर दिखाया. आज के दौर में युवाओं को उसी मर्यादित क्षेत्र में रहने की आवश्यकता है.

घर वापसी पर दो टूक

घर वापसी (Ghar Wapsi) के सवाल पर संत ने कहा कि अगर कोई अपनी मर्जी से गया है और वापस आना चाहता है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका रिटर्न होना हमारे लिए बहुत ज्यादा लाभदायक नहीं है, क्योंकि हम अपनी जगह पर बहुत मजबूती से खड़े हैं. हमारी परंपरा तो दो रोटी में से एक गाय-कुत्ते को देने की है, हम स्वाभिमानी हैं.

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