राजस्थान के बहुप्रतीक्षित मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में अक्टूबर महीने से जंगल सफारी शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में है. वन विभाग ने सफारी संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली है. नोलाव स्थित मुख्य प्रवेश द्वार लगभग तैयार है, जहां केवल रंग-रोगन और कुछ अंतिम औपचारिक कार्य शेष है. करीब 30 किलोमीटर लंबा सफारी ट्रैक भी विकसित किया जा चुका है. इसके बावजूद जंगल सफारी की शुरुआत से पहले सबसे बड़ी चुनौती गागरोन से नोलाव मेन गेट तक पहुंचने वाली सड़क बनी हुई है, जो अब तक नहीं बन सकी है.
कच्चा और उबड़-खाबड़ रास्ता
विडंबना यह है कि जिस मार्ग से होकर पर्यटकों को सफारी स्थल तक पहुंचना है, वहां आज भी कच्चा और उबड़-खाबड़ रास्ता है. बारिश के मौसम में यह मार्ग कीचड़ और गड्ढों से भर जाता है, जिससे आवागमन बहुत कठिन हो जाता है. ऐसे में अक्टूबर से प्रस्तावित जंगल सफारी की सफलता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.
सड़क मंजूरी मिली, लेकिन प्रक्रिया अटकी
गागरोन से नोलाव तक सड़क निर्माण के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से आवश्यक क्लीयरेंस पहले ही मिल चुकी है, और बजट स्वीकृत कर दिया गया है. इसके बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग अब तक न तो टेंडर प्रक्रिया शुरू करवा सका और न ही निर्माण कार्य. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे. हालांकि, वर्तमान समय में भी निर्माण कार्य शुरू हो जाए, तब भी सड़क पूरी होने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है. ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित जंगल सफारी सड़क बनने से पहले ही शुरू होने की संभावना है.

सड़क कच्ची होने की वजह से आने-जाने वालों को बहुत परेशानी होती है. (NDTV)
सिर्फ पर्यटक ही नहीं, ग्रामीण भी प्रभावित
यह मार्ग केवल जंगल सफारी तक पहुंचने का रास्ता नहीं है, बल्कि नोलाव, लक्ष्मीपुरा, नारायणपुरा, राजपुरा और गोलाभाव सहित कई गांवों के लोगों के आने-जाने का मुख्य मार्ग भी है. बारिश के दिनों में सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों के स्कूल जाने और कृषि कार्यों के लिए आने-जाने में भी मुश्किलें होती हैं.
ग्रामीण लंबे समय से इस सड़क के निर्माण की मांग करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि यदि सड़क बन जाती है, तो न केवल उनकी समस्याएं दूर होंगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी.
ग्रामीणों में खुशी और चिंता दोनों
जंगल सफारी शुरू होने की खबर से स्थानीय लोगों में उत्साह है. उनका मानना है कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के खुलने से झालावाड़ पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा, और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, साथ ही ग्रामीण यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब पर्यटक मुख्य गेट तक ही आसानी से नहीं पहुंच पाएंगे, तो सफारी का संचालन कितना सफल हो सकेगा.
सबसे महत्वपूर्ण नोलाव क्षेत्र
वन विभाग के अनुसार, नोलाव क्षेत्र मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. लगभग 30 किलोमीटर का सफारी ट्रैक तैयार किया गया है. पिछले साल में सबसे अधिक समय तक बाघों की मौजूदगी इसी क्षेत्र में दर्ज की गई थी. यही कारण है कि नोलाव को जंगल सफारी के मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया गया है. वर्तमान में झालावाड़ जिले में टाइगर रिजर्व का यही एकमात्र प्रवेश द्वार प्रस्तावित है.
पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि मुकुंदरा में जंगल सफारी शुरू होने से झालावाड़ पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बना सकता है. इससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन इन संभावनाओं को साकार करने के लिए सबसे पहले सुरक्षित और सुगम सड़क संपर्क सुनिश्चित करना आवश्यक होगा.
अब सभी की निगाहें सरकार पर है कि क्या अक्टूबर से पहले सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर पर्यटकों और ग्रामीणों को कच्चे रास्ते के सहारे ही मुकुंदरा की जंगल सफारी तक पहुंचना पड़ेगा.
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