Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है. कभी पूर्वी राजस्थान की लाइफलाइन कहलाने वाला यह बांध आज पानी के बंटवारे को लेकर एक गंभीर विवाद का केंद्र बना हुआ है. गंभीर नदी पर बना यह विशाल बांध करौली और सवाई माधोपुर के किसानों की प्यास बुझाने के लिए बनाया गया था, लेकिन पिछले 20 सालों से यह दो समुदायों और दो क्षेत्रों के बीच टकराव का अखाड़ा बना हुआ है.
आखिर क्यों सुलग रहा है पांचना बांध?
इस विवाद की जड़ें वर्ष 2006 में हुए गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान से जुड़ी हैं. बांध बनने के बाद जब नहरों के जरिए कमांड एरिया में पानी छोड़े जाने की बारी आई, तो डाउनस्ट्रीम यानी बांध के निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया. ग्रामीणों का तर्क है कि बांध के निर्माण के लिए उनकी उपजाऊ जमीनें डूब क्षेत्र में चली गई हैं, इसलिए पानी पर सबसे पहला अधिकार उन्हीं का है. दूसरी ओर कमांड एरिया के किसान हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं.
दो समुदायों की लड़ाई या किसानों का हक?
समय के साथ इस जल विवाद ने सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया है. इसे अक्सर मीणा बनाम गुर्जर समाज की लड़ाई के तौर पर देखा जाता है. कमांड एरिया में मीणा समुदाय का प्रभाव माना जाता है, जबकि डाउनस्ट्रीम के अधिकांश गांव गुर्जर बाहुल्य हैं. हालांकि, दोनों ही पक्ष जोर देकर कहते हैं कि यह किसी जाति विशेष की लड़ाई नहीं है, बल्कि अपने हक के पानी और सिंचाई की व्यवस्था के लिए किया जा रहा संघर्ष है. कमांड एरिया के करीब 35 गांवों के किसान अपनी 9,985 हेक्टेयर सूखी भूमि और सिंचाई से वंचित सवा लाख से अधिक लोगों की दुर्दशा का हवाला दे रहे हैं.
क्या कहते हैं नेता और क्या है सरकारी रुख?
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से समाधान की अपील की है. पायलट का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि किसानों के हितों से जुड़ा है. उन्होंने जोर दिया कि सरकार को कमांड एरिया और डाउनस्ट्रीम दोनों पक्षों को विश्वास में लेकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए. पायलट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे को जातीय रंग देने की कोशिश से बचना चाहिए.
वहीं राज्य सरकार सक्रियता दिखा रही है. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार कमांड एरिया में पानी छोड़ने की पुरजोर मांग की है. दूसरी ओर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम का कहना है कि सरकार सभी पक्षों के साथ बातचीत कर सहमति से समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है.
वर्तमान में क्या है स्थिति
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. एक तरफ डाउनस्ट्रीम के गांवों के लोग बांध पर पहरा दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ कमांड एरिया के किसान खंडीप गांव में महापड़ाव डाले हुए हैं. दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग को बाधित करने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं और दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है. भरतपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित की जा रही संयुक्त बैठक से लोगों को कुछ उम्मीद बंधी है. बीस साल बाद क्या इस बार पांचना का पानी खेतों तक पहुंच पाएगा या यह विवाद फिर से राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा.
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