
राजस्थान के भीलवाड़ा के मांडल कस्बे में तीन दिन बाद मंगलवार को बाजार खुले. बाजार के खुलते ही ग्रामीण विरोध करते हुए सड़कों पर उतर गए. उनका तेजाजी चौक से रैली के रूप में एसडीएम ऑफिस जाकर ज्ञापन देने का कार्यक्रम था. लेकिन पुलिस ने ग्रामीणों की रैली को बाजार में जाने से रोका तो विरोध प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण धरने पर बैठ गए. पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए. वहां से नारेबाजी करते हुए वो एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया.
बस स्टैंड पहुंचने पर रैली में शामिल ग्रामीण आक्रोशित हो गए और एसडीएम कार्यालय के गेट के बाद पुलिस से उलझ गए. ग्रामीणों को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी. बाद में ग्रामीणों ने एसडीएम उगमीचन्द को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैए के खिलाफ नाराजगी जताई. उन्होंने मांग की कि छड़ी मुबारक और दसवीं के विवाह के दिन उपजे विवाद की निष्पक्ष जांच कराई जाए.
एसडीएम के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता भी की. प्रतिनिधिमंडल में शामिल सूर्यप्रकाश सुवालका ने बताया कि पुलिस ने कुछ ऐसे युवाओं को आरोपी बना दिया है, जो निर्दोष हैं. पूर्व में हुए घटनाक्रम में जो भी आरोपी हैं, पुलिस ने अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे हिंदू समाज में नाराजगी है. सुवालका ने यह भी बताया कि एसडीएम से आज पूरे घटनाक्रम पर वार्ता हुई है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी मुल्जिमों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. उधर एसडीएम हुक्मीचंद का कहना है कि आज की प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता में उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वह किसी तरह की अफवाह में नहीं आए और सावधान रहें. साथ ही कोई अफवाह फैलाए तो इसकी सूचना भी हमें समय पर दें.
क्या है विवाद?
गौरतलब है कि मांडल कस्बे में 4 दिन पहले मोहर्रम के जुलूस के दौरान दो पक्ष आमने-सामने हो गए. सैकड़ों सालों से मांडल कस्बे में दसवीं तिथि के दिन गांव में भगवान चारभुजा नाथ का बेवाण निकलता है. उसी दिन मोहर्रम की छड़ी का जुलूस निकल रहा था, उस जुलूस के दौरान बज रहे डीजे की आवाज को बेवाण में शामिल लोगों ने कम करने की मांग की. लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया इसी बात पर विवाद हो गया था और दोनों पक्षों में तनाव व्याप्त हो गया था.