
Pushkar Mela 2023: 'यदि राजस्थान को जानना है तो पुष्कर मेला में आइए'. इस मेले से आप पूरे प्रदेश को जान पाएंगे. राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध पुस्कर मेले के बारे में उक्त बातें चर्चित हैं. हर साल कार्तिक के मेले में आयोजित होने वाले पुष्कर मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यहां देश के साथ-साथ विदेश से भी बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं. इस साल के पुष्कर पशु मेले का आगाज हो रहा है. इस बार राज्य में चुनाव के कारण पुष्कर पशु मेले पर बड़ा प्रभाव पड़ा है. पुष्कर तीर्थ नगरी में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर पशु मेले का आज से विधिवत आगाज हो गया है. पशुपालन विभाग की ओर से मेला मैदान में झंडा चौकी की स्थापना की गई. इसके साथ ही विभाग की ओर से मेला क्षेत्र में आए पशुपालकों पशुओं के लिए बिजली रोशनी की व्यवस्था शुरू कर दी गई.
झंडा चौकी से मेले की विधिवत शुरुआत
मेला मैदान में ऊंट और अश्व की आवक शुरू हो गई है. अलग-अलग जगहों से आएं पशु मालिक तंबुओं में डेरा डाल दिए गए. वर्ष भर सुने पड़े धोरों में रंगत लौटने लगी है. पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि पशु चिकित्सालय में झंडा चौकी से मेले की विधिवत शुरुआत की गई.
दावा- सभी व्यवस्थाएं पूरी, लेकिन जमीनी हकीकत में कई खामियां
संपूर्ण मेला मैदान में पशुओं के लिए कल 39 पानी की खेलिया बनाई गई है. पानी भर दिया गया है. मेला क्षेत्र में कुछ स्थानों पर बिजली की व्यवस्था की गई है. वहीं दूसरी तरफ पशुपालन विभाग मेला क्षेत्र में पशुपालकों के लिए माकूल व्यवस्था उपलब्ध करवाने की बात कह रहा है लेकिन मेला क्षेत्र में अभी भी कई पानी की खेलिया खाली पड़ी हुई है. पशुपालकों को पानी को लेकर किल्लत उठानी पड़ रही है.

पुष्कर मेला 2023 में लगे झूले.
चुनाव के लिए इस बार 7 दिन ही चलेगा मेला
मालूम हो कि पुष्कर मेले को पुष्कर पशु मेला नाम से जाना जाता है. पुष्कर पशु मेला 15 दिन तक चलता है. लेकिन चुनाव के कारण 7 दिनों में ही समेट दिया जायेगा. इस मेले में जनकल्याणकारी प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है लेकिन इस बार इन कार्यक्रमों को भी निरस्त कर दिया गया है.
अजमेर से 11 किमी दूर रेगिस्तान पर सजता है पुष्कर मेला
अजमेर से 11 किलोमीटर दूर रेगिस्तान किनारे बसे पुष्कर में हर साल पवित्र मेले का आयोजन होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर झील के किनारे मेला सजता है. इस साल प्रशासनिक स्तर पर पुष्कर मेला 20 नवंबर से शुरू होकर 27 नवंबर तक चलेगा.

पुष्कर मेला के लिए तंबू बनाते लोग.
पुष्कर मेले का इतिहास की जानकारी
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस मेले का आयोजन 100 साल से भी पहले से चला आ रहा है. हर साल की तरह इस बार भी आसपास के ग्रामीण धार्मिक अनुष्ठान, लोक संगीत और नृत्य करके यहां समृद्ध हिंदू संस्कृति का जश्न मनाएंगे. रेगिस्तान की वजह से पुष्कर मेले में ऊंट का भी महत्व बढ़ जाता है.
यहां ऊंट को बड़ी ही खूबसूरती से सजाया जाता है और उनके गले में घंटियां लटकायी जाती हैं. यहां जानवरों को उनकी कड़ी मेहनत के लिए सम्मानित भी किया जाता है. यह सबसे बड़ा पशु मेला भी है. देश से लेकर विदेशियों तक के आकर्षण का केंद्र है.

पुष्कर मेला परिसर का मुख्य द्वार.
पुष्कर मेले की खासियत
1. पुष्कर मेले के आयोजनस्थल से 15 किमी दूर अजमेर शरीफ दरगाह है, जहां काफी लोग पहुंचते हैं.
2. इस मेले में लोक संगीत और नृत्य का आयोजन होता है. देश के कई फ्यूजन बैंड यहां परफॉर्म करने आते हैं. कई कार्यक्रम होते हैं.
3. इस मेले में कैंपिंग और हॉट एयर बैलून की सवारी का अपना ही मजा होता है.
4. ऊंट के डेजर्ट सफारी का आनंद उठाने भी लोग पुष्कर मेला देखने पहुंचते हैं.
5. यह सबसे बड़ा पशु व्यापार मेला है, जिसमें कृषिविद्, किसान, पशुपालक और डेयरी उद्योग से जुड़े लोग मवेशियों और ऊंटों को बेचने और खरीदने के लिए आते हैं.
कई प्रतियोगिताएं होगी आयोजित
पुष्कर पशु मेला-2023 के दौरान पशु पालन विभाग द्वारा विभिन्न वर्गो की पशु प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी.
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि पुष्कर पशु मेला इस वर्ष 14 नवम्बर से 27 नवम्बर तक आयोजित किया जाएगा. इसमें विभिन्न पशु प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी.

पुष्कर पशु मेले में आया घोड़ा.
दुग्ध प्रतियोगिताएं गीर नस्ल, संकर, हॉलिस्टीन एवं जर्सी गाय की होगी. इसी प्रकार पशु नस्ल प्रतियोगिता गीर नस्ल (दुधारू गाय, शुष्क गाय, सांड-बछड़ा एवं बछड़ी), संकर हालिस्टीन (दुधारू गाय, शुष्क गाय, ओसर व बछड़ी), भैंस वंश (भैंस व पाडा), अश्व वंश (नर ऊंट, मादा ऊंट व सवारी ऊंट) तथा नागौरी बैल जोड़ी (अदंत, 2 से 4 दांत व 6 से 8 दांत) वर्ग की होगी.
50 अधिकारी और 175 कर्मियों की लगाई गई ड्यूटी
पुष्कर पशु मेले में पशुपालन विभाग के विभिन्न सम्भागों में 50 अधिकारी एवं 175 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. पशुओं की निःशुल्क चिकित्सा के लिए 3 दड़ा चिकित्सालय, एक मोबाईल यूनिट तथा प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय पुष्कर में 24 घण्टे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहेगी.
मंगलवार 14 नवम्बर को झण्डा चौकी एवं 16 नवम्बर से सभी प्रवेश स्थल पर चौकियों की स्थापना की जाएगी. इस दिन से सफेद चिट्ठी तथा पशु रवन्ना की शुरूआत की जाएगी. गीर एवं संकर नस्ल पशु प्रदर्शनी का उद्घाटन 19 नवम्बर को किया जाएगा.
इसी के साथ प्रतियोगिताएं प्रारम्भ होगी. सर्वश्रेष्ठ गीर पशु, सर्वश्रेष्ठ दुधारू पशु एवं सर्वश्रेष्ठ मेला पशु का चयन 22 नवम्बर को किया जाएगा. पुरस्कार वितरण समारोह मेला मैदान में 27 नवम्बर को आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही मेले का विधिवत समापन होगा.
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